Sikhism

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डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना?
डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना?
31 min
डॉक्टर अंबेडकर मृत्यु की रात को भी क्या कर रहे थे? वह धर्म पर ही किताब लिख रहे थे, और उन्हें बड़ी हड़बड़ी थी कि इसको पूरा कर दें। तबीयत बहुत ख़राब थी, दिख रहा था कि जाने वाले हैं। उनकी मृत्यु के बाद वह किताब प्रकाशित हुई, ‘The Buddha and His Dhamma.’ वह कोई पॉलिटिकल या इकोनॉमिक्स की किताब नहीं लिख रहे थे। वह धर्म पर लिख रहे थे। जो भारतीय दर्शन रहा है, उसकी सारी खूबियाँ बौद्ध धर्म में ज़बरदस्त तरीके से मौजूद हैं। बौद्ध धर्म तो पूरा ही जिज्ञासा का धर्म है, रूढ़ियों के लिए वहाँ एकदम ही कोई जगह नहीं है।
Love Is Dangerous
Love Is Dangerous
9 min
“I love my job as long as I'm paid for it.” Can you work without being paid? If yes, then probably there is some beginning of love. There are ten things we all like, and all liking or disliking is conditional, and the mark of love is that it survives all conditions. If you come to something that is dearer to you than life itself, then you know what love is. Love is dangerous, because it would mean you have come to something that's more precious to you than life itself.
One Realization That Ends All Attachment
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6 min
The other must exist in your life, and vice versa, only for the sake of internal elevation, to make you into a better person. Don't you see the impact the other one is having on your life? Seeing is the key. What does seeing mean? Seeing implies understanding. See and ask yourself: What is the impact upon me? And if you see that, you'll just push it aside. It will be spontaneous. You won't even require to think, because now you have seen.
जवाब देना होगा
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5 min
धर्म तो सबसे ऊँची बात होनी चाहिए न? तो धर्म के नाम पर ऐसे काम क्यों कर रहे हो, जो एक छोटे बच्चे को भी दिख रहा है कि गलत है? और सबसे खौफ़नाक बात ये है, कि हमारे बच्चों को धीरे-धीरे झटका लगना बंद हो जाता है। वो इसी माहौल के हो जाते हैं, रच-बस जाते हैं। ज़िंदगी हिसाब करेगी, जवाब माँगेगी और तब लज्जित होने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
So, You Want To Change The World?
So, You Want To Change The World?
16 min
Every living being, from humans to the smallest species, is trying to change the world to suit its own needs. But this is not intended to do any good to the world, it is just coming from the little ego. And the ego will not say, “I'm not all right;” it will try to change the world. So, if your idea of ‘good’ is only relative to your personal self, is it right to impose it on others? You must be clear about why you aspire to change the world, and whether you have brought about any change in yourself first.
लोग हर्ट क्यों करते हैं?
लोग हर्ट क्यों करते हैं?
15 min
तुम और क्या करोगे, भीतर परेशान हो तो दूसरों को परेशान करोगे। ‘आई लव यू’ भी बोलते हो, तो तुम्हारी आँखों में आशा रहती है। और फिर जब वो उम्मीद पूरी नहीं करेगा, तो कहोगे: ‘हर्ट।’ जो भी बात है, उसको थोड़ा खुला रखना सीखिए। देना सीखो और लो भी तो उसी से, जो बिना उम्मीद के दे रहा हो तुमको।
तुम मजबूर हो नहीं, बस मजबूरी पकड़ रखी है
तुम मजबूर हो नहीं, बस मजबूरी पकड़ रखी है
32 min
गिरोगे, मिट्टी लगेगी चेहरे पर, क्रोध भी आएगा, हारते हुए भी प्रतीत होओगे। ये सब अनुभव होंगे, और जब अनुभव हों तो ये मत सोच लेना कि प्रक्रिया टूट गई। होता है भाई। बल्कि हार रहे थे हारते-हारते जीत गए, तब तो और मज़ा है।
बाज़ार में हूँ, पर खरीददार नहीं
बाज़ार में हूँ, पर खरीददार नहीं
23 min
मुक्ति का मतलब ये नहीं है कि किसी को छूना नहीं है; नदी से कहना है, दूर हट, मैं पुरुष हूँ, तू प्रकृति है। आ गई भ्रष्ट करने बार-बार चली आती है। तू भी आ जाती है। न जाने कितनी सारी तो तुम हो; कोई इधर से घुस रही, कोई उधर से घुस रही। छोटी, बड़ी, लंबी, चौड़ी, हरी, काली, नीली, पीली, हर रंग की होती हैं, आ जाती हैं। किसी को मना नहीं कर रहा, वो सबको आलिंगन में ले रहा है और कह रहा है, तुम सब भी आ जाओ, तो भी मैं तो रहूँगा सागर ही।
प्यार किया नहीं जाता, बस हो जाता है?
प्यार किया नहीं जाता, बस हो जाता है?
20 min
भारत के सारे जवान लोगों का अब यही नारा है: कुछ और न आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है। प्रेम हल्की बात नहीं होती है, भाई! एक तरीके से प्रेमी बनने का अर्थ होता है चिकित्सक बनना; जिससे प्रेम करते हो, तुम्हारे ऊपर उसके सुधार और स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी आ जाती है। प्यार ऐसी चीज़ है, जिससे बच भी नहीं सकते, लेकिन बिना पात्रता के किया, तो फिर तुम्हें कोई बचा भी नहीं सकता। करना तो पड़ेगा ही, लेकिन बिना समझ-बूझ कर करा, तो फिर वो प्यार नहीं है, वो अत्याचार है।
भारत सबसे धार्मिक और सबसे गंदा देश क्यों?
भारत सबसे धार्मिक और सबसे गंदा देश क्यों?
18 min
मेरे घर का मंदिर साफ़ रहेगा, बाकी मंदिर गंदे हैं तो रहें। क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मैं जाकर अपने उद्धार के लिए गंगा में डुबकी मार रहा हूँ और गंगा को गंदा कर रहा हूँ? दुनिया में किसी देश में इतनी गंदी नदियाँ आपको नहीं मिलेंगी। वाराणसी शायद दुनिया का सबसे पुराना नगर है, भोले बाबा की नगरी है, और जाकर देखो गंदगी। ख़ुद साफ़-स्वच्छ होकर रहे आना धर्म नहीं होता। ‘तुझे साफ़ करने की ख़ातिर मुझे ख़ुद मैला होना स्वीकार है,’ यह धर्म होता है।
Why Should Someone Study Philosophy?
Why Should Someone Study Philosophy?
11 min
This in itself is a philosophical question. This is why you should study philosophy, because you already have this question. Philosophy is your affection for the Truth, your leaning towards the Truth. Don’t you want to know the Truth? How many of you are happy with lies? Nobody. So, it is this love for Truth that we all innately have; that’s called philosophy.
आई टेक नथिंग पर्सनली
आई टेक नथिंग पर्सनली
30 min
चार्ली चैप्लिन की कॉमेडी होती है, उसमें वो बेचारे हमेशा गिर रहे होते हैं, पिट रहे होते हैं। मज़ा आता है या नहीं आता है? कितना हँसते हो। और अपने साथ हो जाता है तो? अपने साथ भी जब हो, तो यही मानो, दूसरे के साथ हुआ है। मैं सब कुछ ऐसे ही लेता हूँ, जैसे चार्ली चैप्लिन के साथ हो रहा हो, मेरे साथ नहीं हो रहा। आई टेक नथिंग पर्सनली। जितना दुनिया पर आश्रित रहोगे, दुनिया उतनी चोट मारेगी। और दुनिया पर आश्रित नहीं हो, तो दुनिया के भाँति-भाँति के रंग उल्लास की बात बन जाते हैं।
संघर्ष ही साधना
संघर्ष ही साधना
12 min
दुनिया ऐसी हो जाए और ज़िंदगी ऐसी हो जाए कि किसी विरोध की ज़रूरत ही न पड़े। पर आज ऐसा नहीं है, आज बहुत कुछ ऐसा है जिसे विरोध की ज़रूरत है। तो मैं वो विरोध कर रहा हूँ ताकि जो कुछ हटाया जाना है, मैं उसको हटा दूँ और मेरे बाद, मेरे अलावा कम ज़रूरत पड़े किसी को उतना जूझने की। लेकिन मान लो, मैं काम नहीं कर पाता पूरा, जिसकी बहुत संभावना है, तो जूझने से डरना मत। याद रखना कि संघर्ष इसीलिए है ताकि एक दिन संघर्ष न करना पड़े।
बोध पहले आता है या प्रेम?
बोध पहले आता है या प्रेम?
23 min
प्रेम ऐसी चीज़ है जो बोध के पहले भी चाहिए और बोध के बाद भी आती है। बोध से पहले कौन-सा प्रेम चाहिए? मैं जो उच्चतम और सुंदरतम हो सकता हूँ, वो मुझे होना है; ये है आंतरिक प्रेम, परम प्रेम। परम प्रेम कहता है, बोध होना चाहिए और जब बोध होता है, तो फिर उसके होने से आप जान जाते हो कि दुनिया में आपके प्यार के लायक कौन-सा विषय है। तो सबसे पहले परम प्रेम, फिर बोध और फिर साधारण सांसारिक प्रेम।
IISc Students Debate the Gita with Acharya Prashant in Bangalore
IISc Students Debate the Gita with Acharya Prashant in Bangalore
24 min
Drop the center of confusion, come to the center of clarity. Drop what the masses practice, come to the direct route of self-realization. That’s what it means.
सच्चा गुरु मिलता क्यों नहीं?
सच्चा गुरु मिलता क्यों नहीं?
24 min
जो भीतर के अंधेरे को हटा सके उसके लिए नाम दिया गया गुरु। गुरु शब्द का इतना महत्त्व है कि सिखों ने मंदिर को नाम दिया गुरुद्वारा। गुरु नानक साहब उच्चतम कोटि के और असली गुरु हैं, पर कितने लोग हैं जो वास्तव में गुरु नानक साहब के जीवन पर और उनकी सीख पर चल रहे हैं? जो एक से बढ़कर एक अंधविश्वास के विक्रेता हैं, उनको हमने नाम दे दिया गुरु का। आपकी उच्चतम संभावना को जो अभिव्यक्ति देने में मदद कर सके, उसका नाम गुरु है। बहुत खोजें, बहुत संदेह से भरे रहें, परीक्षण करें, यूँ ही किसी को गुरु मत बना लीजिए।
You Fear Death Because You’ve Never Lived
You Fear Death Because You’ve Never Lived
5 min
Death is certain for everybody in the future. What matters is that today, you are alive. Wasting time is bad even for an otherwise healthy young person. But when you know that your clock is ticking, then wasting time makes no sense at all. Let every day be a celebration of some kind or the other. Be free, sit together, eat together, travel together, and make the best use of whatever time is there.
इस दीवाली पर ‘राम निरंजन’ या सिर्फ़ ‘मनोरंजन’?
इस दीवाली पर ‘राम निरंजन’ या सिर्फ़ ‘मनोरंजन’?
11 min
साल भर जो निरंजन में जिया है, उसके लिए कल राम निरंजन; और साल भर जिसने मनोरंजन ही पाला है, उसके लिए फिर पर्व भी मनोरंजन। अंजन माने क्या होता है? कालिमा। तो राम निरंजन न्यारा रे, अंजन सकल पसारा रे। समझ रहे हो? अब आपको तय करना है कि सकल पसारा माने चहुदिश जो ये व्याप्त है, आपको इसका होना है या इससे न्यारा होना है। न्यारा माने अलग, अस्पर्शित।
ट्रू रिलिजन क्या है?
ट्रू रिलिजन क्या है?
12 min
The spirit of question. दो लोगों का साथ बैठ के कोशिश करना कि हम समझें कि दुनिया क्या है? ज़िंदगी क्या है? हम कहाँ कैसे सोच रहे होते हैं? हमारी ड्रीम्स कहाँ से आती हैं? डेथ क्या है? लाइफ़ क्या है? लव क्या है? When you go into these questions and not just once, but continuously, you are continuously observing life — वो ट्रू रिलिजन है। उसमें जादू, ये कहानी, वो कहानी इन सब के लिए कोई जगह नहीं होती। नो मिरेकल, नो सुपरस्टिशन, बट डीप डीप ऑनेस्टी।
सच से भागकर कहाँ जाओगे?
सच से भागकर कहाँ जाओगे?
10 min
कभी भी आपके साथ ऐसा हो रहा हो कि कोई चीज़ बाद में समझ में आ रही हो, तो ये याद रख लीजिए, जो चीज़ आपको बाद में समझ में आ रही है, वो आपको हमेशा से ही समझ में आ रही थी। बाद में कुछ नया नहीं समझ में आया। बाद में आपने बस उसको एकनॉलेज करा है। बाद में आपने उसको बस अभिस्वीकृति दी है। पता पहले से था, पर हम उसको एक्सेप्ट नहीं कर रहे थे। हम में यह क्षमता होती है, नोइंग बट नॉट एक्सेप्टिंग। पता पहले से था पर उसको एक्सेप्ट नहीं कर रहे थे, क्योंकि उम्मीद थी कि क्या पता मज़े आ ही जाएँ आगे। अब जब मज़े नहीं आए, उम्मीद टूट गई, तो हम एकनॉलेज कर लेते हैं कि हाँ, गड़बड़ हो गई। गड़बड़ हो रही है, ये शुरू से ही पता था।
तुम्हारी बर्बादी के दो कारण: झूठा आत्मविश्वास और बहाने
तुम्हारी बर्बादी के दो कारण: झूठा आत्मविश्वास और बहाने
15 min
वो जो भीतर बैठ के ये भी कह रहा है कि "मैं बर्बाद हो गया," वो बस यही कह रहा है कि जो ऑब्जेक्ट मुझे अच्छा लगता था, मुझे वो नहीं मिला। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उसके पास अब कोई ऑब्जेक्ट नहीं है। इसका मतलब ये है कि वो अभी भी कोई और ऑब्जेक्ट पकड़ कर बैठा ही हुआ है। तो सारे दुख की वजह ये नहीं होती कि ऑब्जेक्ट नहीं है। उसकी वजह होती है कि ईगो अभी भी है, डिज़ायर अभी भी है। और "मुझसे कुछ नहीं होगा" ये आईडिया अभी भी है।
मैं आपको खोना नहीं चाहती
मैं आपको खोना नहीं चाहती
40 min
मेरे साथ चलने का ये मतलब है कि आप कहीं नहीं पहुँचने वाले, आप बस मिटने वाले हो। कौन चलेगा मेरे साथ, न आप चल सकते हो, न मैं आपसे उम्मीद रखता हूँ कि आप अंत तक मेरे साथ चल सकते हो, क्योंकि वो अंत यात्रा का अंत नहीं होगा, वो अंत आपका अंत होगा। कौन ऐसा पागल है जो अपना अंत कराने के लिए मेरे साथ चले? कभी-न-कभी तो आप टपकोगे ही। और जो जितने ज़्यादा अवधि तक मेरे साथ रहकर टपकता है, वो उतना ज़्यादा ज़हरीला होकर फिर डसता है।
बुरे लोग साहसी और सफल क्यों होते हैं?
बुरे लोग साहसी और सफल क्यों होते हैं?
6 min
आप तो किसी को समर्पित नहीं हो, न सच को, न झूठ को। आप दोनों को आधे-आधे हो, झूठा आदमी आपसे हमेशा जीतेगा।
Truth Isn’t a Crime
Truth Isn’t a Crime
10 min
In the rule books of the courts, there are offenses of a thousand kinds, but when it comes to life, there is just one offense, ‘Did you live by the Truth or did you betray it?’ Remember that chap called Bhagat Singh and his associates. The courts declared they were guilty, and they were still joyful because they were absolutely not guilty in front of life. Live rightly, and then don’t apologize. That’s it.
How to Choose Work?
How to Choose Work?
7 min
For most of us, work is a random accident. You’re born a girl, so you’ll become a housewife. Born a girl, how will you be an astronaut or a swimmer? Is any self-awareness needed? Do not let your choice of work be dictated by social norms or established channels. When work arises as an expression of your deepest clarity, only then can there be love.
काम में फ्रस्ट्रेशन?
काम में फ्रस्ट्रेशन?
7 min
काम ज़रूरी होते हैं, रिज़ल्ट पर हमारा हक़ नहीं होता। जब फ्रस्ट्रेशन में समय बीत रहा हो, तो तुरंत याद आना चाहिए कि यार, इतना भी समय कहाँ है कि मैं उदास हो पाऊँ। और अगर मेरे पास ये समय है, तो मैं ये समय अपने असली काम से चुरा रही हूँ। काम ज़रूरी है, तो जो कुछ तुम्हारे पास है, सब दे दो न उसको। इतना थक जाओ कि फ्रस्ट्रेट होने के लिए भी एनर्जी न बचे।
Why Do We Go to the Upanishads?
Why Do We Go to the Upanishads?
17 min
Joy is not a problem. Suffering is a problem. I am the sufferer. And if this ‘I’ is the problem, the sufferer, then firstly the ‘I’ itself has to be approached. And when I find that my efforts are getting saturated, I will have to go to a book that talks exclusively of the ‘I.’ The Upanishads are such books, because their subject matter is nothing but the ‘I.’ So, if you come across something that is dealing in stories, beliefs, and deviating from the self, you must know that it is not Vedanta at all.
मौत नहीं, अधूरी कहानी डराती है
मौत नहीं, अधूरी कहानी डराती है
21 min
मृत्यु डरावनी होती ही इसीलिए है, क्योंकि वह एक अधूरी कहानी का अंत होती है। जब कोई अपना चला जाता है, तो हम रोते हैं कि अभी सोचा था इनके साथ यह बातें करेंगे, नहीं कर पाए। अभी सोचा था, इनको साथ ले वहाँ घूम आएँगे, नहीं घूम पाए। बहुत कुछ संभव था, जो हो नहीं पाया। मृत्यु का कष्ट है ही अधूरेपन में, तो मरने से पहले ही पूरे हो जाओ। मरो मरो हे जोगी मरो, मरो मरण है मीठा — मुक्त हो जाओ।
Stop Chasing Praise – Know about Ego and Validation
Stop Chasing Praise – Know about Ego and Validation
3 min
The theoretical reply would be that if condemnation hurts you, then somewhere you are looking for praise. Even if it’s implicit praise or subtle praise, there is some hunger for praise. Or the inner condition that the ego has set is, don’t give me praise, but don’t condemn me either. So there is some condition that the ego is setting on the world. The fact is, the world has a movement, a flow of its own. You cannot set any condition on it. If you are getting hurt, it means there is an expectation, a condition.
प्रेमी वही, जो डटा रहे
प्रेमी वही, जो डटा रहे
14 min
हम अपने आप को बहाना दिए रहते हैं कि अगर मेरे जीवन में प्रेम नहीं है, तो इसलिए नहीं है क्योंकि कठिन है। संगति ऐसों की करिए, जिनकी ज़िंदगी में प्रेम हो, वो आपसे आपके बहाने छीन लेंगे। संगति इसीलिए बहुत बड़ी चीज़ होती है। सौ लोग मिलकर जो सिद्ध कर रहे हैं कि प्रेम असंभव है, इन सौ लोगों की बात को एक दूसरा उदाहरण, एक विपरीत उदाहरण काट सकता है, उसकी खोज करनी चाहिए। और ये सौ उस एक से बहुत घबराएँगे, क्योंकि एक करोड़ लोगों के झूठ को एक आदमी का सच काट सकता है।
How to Stay Loving in a Loveless World
How to Stay Loving in a Loveless World
3 min
When you do not like human beings, you must also remember that they do carry the potential to be lovable. Not just the potential to be loved, but the potential to be lovable. Beyond likable, lovable. So, along with not liking humanity, also comes the responsibility to maybe help them become lovable, to whatever extent one can.
सही काम चुनो, डूब के करो
सही काम चुनो, डूब के करो
7 min
कितनी बार सोचा कि ये रील आख़िरी होगी, बस यहीं पर रुक जाना है, और रात के 3:00 बज गए, 4:00 बज गए। क्या करोगे आप बहुत स्क्रॉलिंग करके, या टीवी, या एक-एक घंटा नहाकर, या दो-दो घंटा खाकर? कुछ नहीं है, बैठे हुए हैं; ऐसे ही, ऐसे ही, ऐसे ही — ‘हाँ भाई, दो चाय और ले आओ।’ जब पता चल गया है कि क्या सही है, तब अपने आप को उसको सौंपना पड़ेगा, शत-प्रतिशत। ये आर्किमिडीज़ जैसी हालत है कि कपड़े पहनना भूल गए; दिनभर काम में डूबे रहे, वापस गए, बस चित्त पड़ गए। पर चूँकि वो चीज़ एक कीमत माँगती है, तो वो 1% लोगों को ही मिलती है।
कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर कैसे निकलें?
कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर कैसे निकलें?
6 min
अहंकार पूरी ज़िंदगी आत्मरक्षा के अलावा और कुछ नहीं कर रहा होता। 'मुझे अपने आप को बचाना है,' और अगर उसे अपने आप को बचाना है, तो वो अपने लिए कोई कठिन लक्ष्य चुनेगा क्या? यह मत कहो कि 'मुझे जो पसंद है, मैं वो काम करूँगा,' तुम वो काम करोगे तो फिर कुछ बदलेगा भी नहीं। जहाँ दिख रहा है कि कमज़ोरी है, वहाँ जाओ — भले ही वहाँ कुछ लाभ न हो रहा हो, भले ही वहाँ कोई पूछने वाला न हो। वहाँ पर ठीक है, पोल खुलेगी, थोड़ी बेइज़्ज़ती होगी, लेकिन कमज़ोरी टूटेगी।
आत्मज्ञान ही दीपोत्सव है
आत्मज्ञान ही दीपोत्सव है
17 min
बाहर सौ सूरज भी जगमगा रहे हों, तो उनसे कहीं ज़्यादा कीमत भीतर के एक दीये की होती है। त्योहार का अर्थ ही यही होता है कि भीतर का दीया प्रज्वलित हो जाए। मनुष्य होने के नाते, प्रज्वलन की सामग्री सब में हमेशा से ही उपलब्ध रहती है। दीया भी रहता है, तेल भी रहता है, बाती भी रहती है — लौ नहीं रहती बस; वो भीतर प्रज्वलित हो जाए, यही उत्सव होता है।
जब मन रोशन हुआ, तब दिवाली जानना
जब मन रोशन हुआ, तब दिवाली जानना
6 min
त्योहार का मतलब ही यही है कि सत्य को कीमत दो; पटाखे नहीं फोड़ने होते, झूठ फोड़ना होता है। किसी को आप सच्चाई के अलावा क्या उपहार दोगे? त्योहार कोई एक दिन की बात नहीं है; वह जीवन की बात है — “पूरा जीवन ऐसा हो कि अंधेरा हावी नहीं होने देंगे; लगातार श्रीराम की ओर ही बढ़ते रहेंगे।” राम की कोई घर वापसी नहीं होती, आपकी राम वापसी होती है।
श्रीराम जैसा होकर उत्सव मनाइए
श्रीराम जैसा होकर उत्सव मनाइए
25 min
दिवाली वह दिन है जब हम अपने जीवन को बहुत ध्यान से देखें और पूछें: हम में इतना डर क्यों है? क्योंकि जो एक बात श्रीराम के साथ बिल्कुल सामने आती है, वह है निडरता। उनके पास क्या था, कुछ भी नहीं। निहत्थे, बिना किसी संपदा के नंगे पांव दो राजकुमार जंगल में, और भिड़ किससे गए? दशानन से। दिवाली पर्व है जब हम अपने आप से पूछें कि आज के रावण कौन हैं और हम भिड़ क्यों नहीं पाते? और रावण आवश्यक नहीं है हमेशा कोई व्यक्ति ही हो। रावण एक सोच भी हो सकती है, एक प्रकार का ट्रेंड, कल्चर भी हो सकता है जिसने हमको दबा रखा हो। भीतर अपने थोड़ा रामत्व तो लाइए, वह उत्सव होगा।
ऐसी दिवाली मनाओ
ऐसी दिवाली मनाओ
41 min
राम को सोने से लगाव था? सोने की लंका, दुनिया का जो बड़े से बड़ा सोने का गढ़ हो सकता था, उसको छोड़कर आ गए। अगर अयोध्या छोड़कर चौदह वर्ष तक वन में भटक सकते हैं तो लंका क्या, इसको भी छोड़ देंगे और फिर वापस जाएँगे। ये राम थे। त्याग और राम समानार्थी शब्द हैं। क्यों न अपने घर से वो सब कुछ त्यागें, जिसकी आवश्यकता नहीं है, और फिर अपने मन से वो सब कुछ त्यागें जो व्यर्थ ही बैठा हुआ है? ऐसी दिवाली क्यों न मनाएँ?
Earned the Right to Celebrate Diwali?
Earned the Right to Celebrate Diwali?
10 min
You need to earn the right to even utter ‘Shri Ram’. If, for 364 days, you have really lived up to Shri Ram, only then must you celebrate the festival of Ramness. For 364 days, your life had nothing to do with Shri Ram, and on the 365th day, you join the noisy bandwagon. Shri Ram, who stands for that which can neither be bought nor sold, his festival has been turned into an orgy of sales and discounts. Live your life just as Shri Ram lived his life, and then you will have the right to celebrate Diwali.
You’ve Already Won: Now Fight the War
You’ve Already Won: Now Fight the War
19 min
The Gita is not made precious by the fact that Arjun won. No, Arjun may win, or Arjun may lose. The real thing lies in having the Truth represented by Shri Krishna at the heart. When you are fighting the right war, then you have won even before the war has begun. That does not mean that you will no longer fight. You will still fight, and you will fight for the sake of external victory. But inwardly, you are victorious even before shooting the first arrow.
जिस तन लगिया इश्क़ कमाल || आचार्य प्रशांत, बाबा बुल्लेशाह पर (2018)
जिस तन लगिया इश्क़ कमाल || आचार्य प्रशांत, बाबा बुल्लेशाह पर (2018)
17 min

जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल,

नाचे बेसुर ते बेताल | टेक |

दरदमंद नूं कोई न छेड़े,

जिसने आपे दुःख सहेड़े,

जम्मणा जीणा मूल उखेड़े,

बूझे अपणा आप खिआल

जिसने वेस इश्क़ दा कीता,

धुर दरबारों फ़तवा लीता,

जदों हजूरों प्याला पीता,

कुछ ना रहा सवाल जवाब

जिसदे अन्दर वस्स्या

Living in Security And Freedom
Living in Security And Freedom
26 min
At the level of the body, this world will have an influence on you, and there is no need to even contest that. Let it happen, because it is going to happen anyway. But inwardly, let there be a place so sacred that nobody is allowed to enter — not even you. And when that is there, you can freely participate in the world because you'll no longer be afraid. You'll say, “Come what may, I'm secure within.” Then you will live in deep security, and we all know how pleasing security is.
ज़िंदगी दो बातों की — एक आग, एक आशिक़ी
ज़िंदगी दो बातों की — एक आग, एक आशिक़ी
21 min
कोई पूछे सुबह-सुबह, “कहाँ जा रहे हो?” बोलो, “मोहब्बत करने।” मैं जी रहा हूँ, और यूँ ही नहीं जी रहा हूँ, मेरी हर धड़कन में आशिक़ी है। ये ज़िंदगी के प्रति प्रेम है — ऐसा प्यार जो परिणाम माँगता ही नहीं। किसके लिए है बात ये सारी? जो कर रहे हैं, उसके लिए है। ये प्रेम यज्ञ की ज्वाला है — काम और आग, जिसमें वो आग हो, वो है योगी। आग का धर्म है हमारा; उपनिषद् कहते हैं, “तुम अमृत की औलाद हो।” मैं और साफ़ करके तुमसे कह रहा हूँ — तुम आग की औलाद हो और आग की औलाद नहीं हो, तो अपने आप को सनातनी मत बोलना।
Self-Worth Is a Lie You've Been Sold
Self-Worth Is a Lie You've Been Sold
41 min
The self is a hollow, incomplete thing by its own admission. It has no free existence of its own; it is nothing but associations with the objects around it, absorbing its worth from the environment. To hide this absence of self-worth, you keep running after all kinds of things, yet the promise of fulfillment is never kept, and you are deceived. Therefore, to have any self-worth, you must have clarity about the self. All wisdom literature is about clearing away your false notions of the self.
श्रीराम: सगुण या निर्गुण
श्रीराम: सगुण या निर्गुण
26 min
हम अपने आराध्यों की कथा, चरित्र, मूर्ति, छवि अपने ही हिसाब से बना देते हैं। हम अपनी सहूलियत, मान्यता और स्वार्थ के अनुसार कालातीत को भी बदल डालते हैं। यह समस्या राम के निर्गुण–निराकार रूप के साथ बिल्कुल नहीं है क्योंकि जो निर्गुण और निराकार है, उसकी कोई मूर्ति ही नहीं, कोई छवि ही नहीं; तुम उसको कैसे ख़राब कर लोगे? इसलिए ज्ञानियों ने कहा कि उनको तो ब्रह्मस्वरूप ही मानना — “राम ब्रह्म परमारथ रूपा, अबिगत अलख अनादि अनूपा।” मात्र वही राम हैं जो कालातीत हैं।
प्रेम और मोह में ये फर्क है
प्रेम और मोह में ये फर्क है
12 min
जहाँ प्रेम है, वहाँ मोह हो नहीं सकता, और जहाँ मोह है, वहाँ प्रेम की कोई जगह नहीं है। मोह में सुविधा है, सम्मान है। प्रेम तो सब तोड़-ताड़ देता है—पुराने ढर्रें, पुरानी दीवारें, सुविधाएँ, आपका आतंरिक ढाँचा, और जो सामाजिक सम्मान मिलता है। प्रेम सब तोड़ देता है। प्रेम इतनी ऊँची चीज़ है कि आप उसमें पुरानी व्यवस्था का विरोध नहीं करते, पुरानी व्यवस्था को भूल जाते हो। प्रेम और मोह दो अलग-अलग दुनियाओं के हैं।
दूसरों को माफ़ कैसे करें?
दूसरों को माफ़ कैसे करें?
7 min
फ़ॉरगिवनेस कुछ होता ही नहीं है, फ़ॉरगेटफ़ुलनेस होता है। ये अपना अपमान है कि एक तो दूसरा घाव दे गया और पीछे से हम उसको लगातार याद रख रहे हैं। ज़िंदगी का नियम है कि जो चीज़ याद रखते हो, वही चीज़ कोई और रूप लेकर दोबारा आ जाती है। भूलना सीखो, आगे बढ़ते चलो, और जगह बनाओ ताकि ढंग के लोग ज़िंदगी में आ पाएँ।
The Violence Hidden Behind Our Festivals
The Violence Hidden Behind Our Festivals
6 min
If you know no philosophy and you are just celebrating Holi, Diwali, or Eid, or Christmas, that's dumb. Very dumb. And you call that as your great culture. No, I will have to sacrifice goats. Bloodshed is the name of religion. What kind of religion? No crackers are needed, even if that kills the air. What is this? AQI of 1,400. But I don't bother. I'm a religious man. What are you celebrating?
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
6 min

Question: If love is death of ego, then how will we live? Man is made of only these things. So, the only thing left will be ‘soul’. So we can say that we have moksha (liberation).

Speaker: The question is: If love is death of ego, then a loving man

Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
6 min

Questioner: If love is death of ego, then loving man will be just soul. So, is love Moksha (Salvation)?

Acharya Prashant: Everything that you just said, is a concept in your mind. Ego lives on concepts; ego lives on thoughts—concepts are thoughts.

What is the definition of a concept? Where

गुरु: न बाबा, न टीचर — तो कौन?
गुरु: न बाबा, न टीचर — तो कौन?
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गुरु ही देव है, माने ऊँचा देव को बाद में मानना, पहले आत्मा को ऊँचा मानो। बाहर कुछ भी ऊँचा नहीं है, जो ऊँची से ऊँची चीज़ हो सकती है, वो तुम्हारे ही भीतर मौजूद है। कितनी आत्मसम्मान की बात है ना ये। पर हम अपने ही प्रति अपमान से भरे हुए लोग हैं। तो हमें लगता है कि वहाँ पर कुछ है और हमें जाकर लोट जाना है, नेताजी हो, कोई हो, लौट जाना है। हीन भावना, अपना ही अपमान।