महाभारत में एक दर्जन जगह आया होगा 'अहिंसा परमो धर्म:,’ लेकिन उसमें साथ में आगे कहीं भी नहीं लिखा है कि 'धर्म हिंसा तथैव च।' 'धर्म हिंसा तथैव च' — अहिंसा तो परम धर्म है लेकिन हिंसा भी धर्म है; किसी भी ग्रंथ में कहीं पर भी नहीं लिखा हुआ है। इससे आपके रोंगटे खड़े हो जाने चाहिए कि ये कौन लोग हैं और ये कौन-सी सेंट्रलाइज़्ड जगहें हैं, जहाँ इस तरह की साज़िशें की जा रही हैं। जो उन्होंने जोड़ा है इसी से उनके मंसूबे पढ़िए — वो हिंसा करना चाहते हैं। यहाँ सीधे-सीधे धर्मग्रंथ के साथ पूरी खिलवाड़ ही कर दी गई है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते, सर। कुछ दिनों पहले मुझे एक फॉरवर्ड(आगे बढ़ाया हुआ संदेश) आया था व्हाट्सऐप पर तो उसमें लिखा था कि महात्मा गाँधी जी ने हम भारतीयों को एक अधूरी सीख दी थी। तो वहाँ पर लिखा था कि "अहिंसा परमो धर्म:" इस तरह की सीख दी थी और इससे नपुंसकता भर दी थी भारतीयों में। इस तरह का इल्ज़ाम लगाया था। और ये भी बोला था कि जो पूरी बात है वो नहीं बताई थी। तो इसके बाद ही शास्त्रों में जो आता है कि ‘धर्म हिंसा तथैव च,’ ये भी लिखा गया है शास्त्रों में तो ये बात महात्मा गाँधी जी ने नहीं बोली।
और फिर कुछ एग्ज़ाम्पल(उदाहरण) दिए थे उसी व्हाट्सऐप फॉरवर्ड में कि जैसे गीता है तो अर्जुन युद्ध लड़ते हैं तो वो भी धर्म के लिए लड़ते हैं। फिर हमारे जो देवी-देवता हैं उनके हाथों में शस्त्र पाए जाते हैं। तो पढ़ने में वो ठीक लगी बात जो फॉरवर्ड में लिखी है, कि ये दो एग्ज़ाम्पल भी हैं। तो आपसे समझना था कि कितनी सच्चाई है इस बात में।
आचार्य प्रशांत: गाँधी जी ने बचा लिया, वरना आमतौर पर आजकल जब कोई बताता है कि सर व्हाट्सऐप फॉरवर्ड आया है तो आमतौर पर यही बता रहा होता है कि वो मेरे बारे में है। जैसे ही तुमने बोला







