जीवन में हम बाहरी संघर्षों में उलझकर असली युद्ध से चूक जाते हैं। असल संघर्ष वह है जो मन के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे विकारों को हटाने के लिए लड़ा जाए। जब मन शुद्ध होता है तो बाहरी चुनौतियों का सामना भी सहज हो जाता है। अपने अंदर की नकारात्मकता को दूर करना ही जीवन की सबसे बड़ी और असली लड़ाई है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
Originally published in Jeevan Dhara on 07 Oct '23
जीवन प्रतिपल संघर्ष है, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौन-सा संघर्ष उचित है। बड़ी लड़ाई वह है, जो अपने खिलाफ लड़ी जाती है, असल संघर्ष वह है, जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है।
हमारा सारा जीवन संघर्ष में ही बीतता है। बचपन में माता-पिता की अपेक्षाओं को पूरा करने का संघर्ष, युवावस्था में नौकरी के लिए भाग-दौड़ और बुढ़ापे में अपने देह को कुछ और वर्षों तक जीवित रखने की चाह। इन चीजों में हम इतना खो जाते हैं कि अपने भीतर चल रहे द्वंद्व को देख ही नहीं पाते।
जीवन प्रतिपल संघर्ष है, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौन-सा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं। बड़ी लड़ाई वह है, जो अपने खिलाफ लड़ी जाती है, असल संघर्ष वह है, जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं।




