प्रश्नकर्ता: शादी को दो साल हुए हैं, झगड़े अब बहुत होते हैं, बात तलाक़ तक पहुँच गयी है, बहुत परेशान हूँ, क्या करूँ?
आचार्य प्रशांत: नहीं, इस पूरे खेल में मैं कहाँ से आ गया? और कब? मियाँ-बीवी और गुरु। क्यों भाई, शादी मुझसे पूछ के करी? झगड़ा मुझसे पूछ के करा? अब क्यों आये हो? और शायद शादी भी इसीलिए हुई कि पूछा नहीं। और फिर झगड़ा भी इसीलिए हुआ कि पूछा नहीं। तो यही समाधान है।
निदान भी बता दिया, समाधान भी बता दिया। गुरु के पास रहते तो संभवतः ऐसी शादी ही नहीं होती। चलो शादी के बाद भी आ जाते तो संभवतः ऐसे झगड़े नहीं होते — ये हुआ निदान, डायग्नोसिस; और समाधान भी बता दिया। तुम कभी दूसरे से थोड़े ही झगड़ते हो। तुम कभी बीवी पर थोड़े ही खफ़ा होते हो। तुम कभी शौहर के बाल थोड़े ही खींचते हो। गुस्सा तुम्हारा स्वयं के प्रति रहता है, उतरता दूसरे पर है। और स्वयं से क्यों खफ़ा हो तुम? क्योंकि अपनेआप को वो दे नहीं पा रहे जो देना है।
देखा है, कोई लक्ष्य बनाओ और उसे न पाओ तो अपने पर कितना गुस्सा आता है। लोग अपने बाल खींच लेते हैं, अपनेआप को थप्पड़ मार लेते हैं। कई बार तो लक्ष्य बनाओ और पाओ नहीं तो आत्महत्या भी कर लेते हो। अपनेआप पर गुस्सा आता है कि नहीं? ‘मैं ये क्यों नहीं कर पाया?’
अभी कल भारत-इंग्लैंड का क्रिकेट मैच चल रहा था। टेस्ट मैच, पहला दिन। एक बल्लेबाज़ घटिया शॉट (मारने की क्रिया) मारकर आउट हुआ। लंच (दोपहर का भोजन) से पहले की आख़िरी गेंद थी, हुक शॉट मार दिया और फिर उसका गुस्सा देखते, अपने ही ऊपर — ‘ये मैंने क्या कर दिया!’




