प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। क्या हम परिवार के साथ दुख, मानसिक तनाव और पीड़ा के बिना मुक्ति की ओर बढ़ सकते हैं? मेरे साथ तो ऐसा होता है कि कुछ समय तक तो शांति बनी रहती है, मगर उसके बाद दोबारा से तनाव, नाराज़गी इत्यादि चलने लगते हैं।
क्या कोई ऐसा गुरु-मंत्र हो सकता है जिसे मैं हमेशा याद रखकर हल्का और फ्री (मुक्त) रह सकूँ?
आचार्य प्रशांत: किससे फ्री रहना है?
प्र: तनाव से।
आचार्य: तनाव दे कौन रहा है? मुक्ति माँग रहे हैं, तनाव से मुक्ति माँग रहे हैं तो बंधन क्या है और तनाव कौन दे रहा है, ये तो बताइए?
प्र: घर-परिवार और समाज में दुनियाभर के तनाव हैं।
आचार्य: मुझे तो समझ में ही नहीं आएगा कि दुनियाभर के तनाव हैं। आपको दुनियाभर के तनाव हैं?
प्र:आचार्य जी, घरेलू चीज़ें तो रहती हैं। ज़िम्मेदारियाँ, ड्यूटी




