फिर वही गलती दोहराना चाहती हैं? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: सर, नमस्कार! पिछली चर्चा को सुनने के बाद मेरे पास दो प्रश्न हैं। एक प्रश्न जो मैं पहले से सोचकर आयी हूँ, मेरा प्रश्न मेरे निजी जीवन से सम्बन्धित है। पाँच साल पहले मेरी शादी हुई थी एक तलाक़शुदा व्यक्ति के साथ जो कि एक इंजीनियर।
मैंने सोचा था कि वो अनुभवी और बुद्धिमान होगा क्योंकि उसके पास पहले से एक वैवाहिक रिश्ते का अनुभव था। लेकिन इन पाँच सालों में मुझे महसुस हुआ कि वह बहुत ही संस्कारित व्यक्ति है। समाज द्वारा काफ़ी ज़्यादा प्रभावित और अपने पारिवारिक जीवन और भाई-बहनों से, और ख़ास तौर पर जातिवाद से अपना पहचान रखने वाला है। यह एक अंतर्जातिक विवाह था।
मैं आठ सालों से मेडिटेशन कर रही हूँ और मुझे उससे काफ़ी फ़ायदा भी हुआ है। यद्यपि मेरी योजना शादी नहीं करने की थी लेकिन इकत्तीस वर्ष की उम्र में मेरी शादी हो गयी। और अब बात ये है कि उनके पारम्परिक मूल्यों और ग्रामीण पृष्ठभूमि की वजह से मैं उसके परिवार के साथ ठीक से ताल-मेल नहीं बना पा रही हूँ।
मैं पिछले दो सालों से लगभग अकेले रह रही हूँ क्योंकि उसका झुकाव उसके परिवार की तरफ़ ज़्यादा है और वो मानता है कि मुझे सारे रिवाज़ों का पालन करना चाहिए। और उसकी वजह से मुझे काफ़ी बुरा-भला अनुभव करना पड़ता है। कुछ मौखिक बहस की घटनाएँ भी घटीं जिसके बाद पश्चात्ताप हुआ।
अब बात ये है कि मैं अलग रह रही हूँ और अपना ख़ुद का घर ख़रीद लिया है। और वह अपनी तैनाती की जगह पर मुझसे लगभग चालीस किलोमीटर दूर रह रहा है। और वह वापस आना चाहता है और तथाकथित रूढ़िगत विवाह करना चाहता है और परिवार की शुरुआत करना और वही सबकुछ। तो मैं चीज़ों को स्पष्ट नहीं कर पा रही हूँ। इन सबके साथ शांति कैसे बनाए रखूँ? और और वह अपनी आध्यात्मिक प्रगति के लिए कुछ नहीं कर रहा।



