
आचार्य प्रशांत: आनंद फ़िल्म में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन की जो आपसी नोंक-झोंक होती थी, बड़ी दिलचस्प थी — कि ज़िंदगी तुमको बड़ी चाहिए कि लंबी चाहिए। ‘बाबू मोशाय, ज़िंदगी बड़ी चाहिए या लंबी चाहिए?’
लंबी चाहिए तो खूब नकारात्मकता से भरे रहो। जितना तुम शक्की रहोगे, प्रकृति ने संयोग…





If your trust has an object, it is mere belief, like saying, "I’ll be rescued because my friend will come." Faith is: "I do not bother whether I’m rescued; I am alright either way." Faith is not dependent on a person or reason; it reflects a fulfilled Self that is unbothered, when you are alright without an objective reason to be alright.
प्रश्नकर्ता: उच्चतम स्थान किसका है? क्या सत्य और ईश्वर एक हैं? जो उच्चतम है, उसके प्रति प्रार्थना का क्या अर्थ है? और दूसरा मुद्दा, दूसरा प्रश्न — रक्षा माने क्या?
आचार्य प्रशांत: हम जैसे होते हैं, रक्षा शब्द का तात्पर्य हमारे लिए वैसा ही होता है। और हम जैसे होते…
आचार्य प्रशांत: वह प्रजापतियों की सृष्टि करके सब पर अपना आधिपत्य रखता है। जैसे सूरज अकेले ही सबको प्रकाशित करते हैं। प्रकाश के स्रोत दो नहीं, प्रकाश के दो नहीं स्रोत हैं, एक है। वैसे ही वह प्रकाश स्वरुप है और वर्णीय है। वर्णीय माने उसी को चुनना, उसी का…
आचार्य प्रशांत: आ नहीं गया, मार-मारकर सामने लाया गया। पत्नी नहीं थी वो, गुरु थी। और ऐसे नहीं पत्नी ने कहा था कि…
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। कल का सत्र बहुत अच्छा था और जब सत्र में जुड़ने करने के लिए हम आवेदन करते हैं, मेल भेजते हैं, उसमें सबसे पहला सवाल पूछा जाता है कि आपकी अपेक्षा क्या है सत्र में भाग लेने से? मेरी जो अपेक्षा थी, वो पहले दस मिनट…
प्रश्नकर्ताः तुलसीदास जी ने कहा है : 'नहिं कलि करम न भगति बिबेकू, राम नाम अवलंबन एकू।' आपका भी वीडियो सुना जहाँ कहीं भी राम नाम का शीर्षक मिला कि राम नाम एक ऐसी चीज़ है जो निराकार और साकार दोनों के बीच का है। तो मैं बच्चों को ये…
प्रश्नकर्ता: नमस्ते, सर। मैं शायद उत्तर भारत के जो करोड़ों लोग हैं, उनमें से ही एक हूँ जिन्हें बचपन से ही हनुमान चालीसा सुन-सुन कर याद हो जाती है या याद करा दी जाती है। पर मैंने देखा कि हाल ही तक ही मुझे हनुमान चालीसा की जो चौपाइयाँ हैं,…
आचार्य प्रशांत: पूछा है कि, "कबीर साहब कह गए हैं कि;
कोटि नाम संसार में, तासे मुक्ति ना होए। आदि नाम जो गुप्त है, बूझे बिरला कोए।। ~कबीर साहब
तो इसमें किस नाम की बात हो रही है? फिर आगे कहते हैं कि ऐसे ही तुलसीदास कह गए हैं कि…
आचार्य प्रशांत: इतना तो हम सभी जानते हैं कि राम के स्पर्श ने रामबोला को तुलसीराम और तुलसीराम को तुलसीदास बना दिया। लेकिन याद रखना होगा कि जैसा भक्त होता है, वैसा ही उसका भगवान भी होता है। भगवान तो भक्त को रचता ही है, भक्त के हाथों भी भगवान…
नामु राम को कलपतरु, कलि कल्यान निवासु।
जो सिमरत भयो भाँग ते तुलसी तुलसीदास।।
~ संत तुलसीदास
आचार्य प्रशांत: राम का नाम 'कल्पतरु' है, कल्पवृक्ष; माँगे पूरी करने वाला, मन चाहा अभीष्ट देने वाला। और कल्याण निवास है, "कल्यान निवासु" – वहाँ पर तुम्हारा कल्याण बसता है। “जो सिमरत भयो"…
होय दूबरी दीनता, परम पीन संतोष।।
~ संत तुलसीदास
आचार्य प्रशांतः कृपालु राम के आगे अपने सारे गुण-दोष खोल कर रख दो, कह दो, सुना दो। इससे जो तुम्हारी दीनता है, जो तुम्हारी लघुता है, जो तुम्हारी क्षुद्रता है, वो दूबरी हो…
राग न द्वेष न दोष दु:ख दास भए भव पार।।
~ संत तुलसीदास
आचार्य प्रशांत: राम से ममता, संसार में समता।
संसार में कुछ ऐसा नहीं जो कुछ दे सकता है, और कुछ ऐसा नहीं जो कुछ ले सकता है, तो यहाँ तो…

आज महर्षि वाल्मीकि जयंती का सुअवसर है। इससे बेहतर शायद ही कोई मौका मिले भारत के आदिकवि को जानने के लिए। इसलिए आज हम उनके विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातें आपके साथ साझा करना चाहते हैं:
महर्षि वाल्मीकि का योगदान
~ भारत व सनातन धर्म में महर्षि वाल्मीकि का योगदान…

Love is great. Love is necessary. Love is beautiful.
But what is love?
For most of us, love is the greatest excitement and comfort—and also the greatest suffering. Whether love has become a problem or something you cherish the most in your life, please go deeper into the matter. Know…

Spirituality is about belonging to existence. Not belonging to a narrow household, or caste or ideology. All these are boundaries. So, wherever there are boundaries, there is violence. Wherever there are boundaries, there is also the fear of being small, powerless, limited. The really non-violent one is at home, everywhere and in every situation. Non-violence is not about following duties. Non-violence is an action in clarity and love. That alone is non-violence.

प्रश्नकर्ता: नमस्ते, आचार्य जी। सर आज काफ़ी अच्छे सीख थे सत्र में। और मेरा प्रश्न भी इस सत्र से ही सम्बन्धित है। सर, आपने बताया था कि मान्यताओं का सम्बन्ध अनुभव से है। प्रारम्भ में हमने चर्चा की था। यानी कि जो विकार हैं, वो भी एक तरह से मान्यताओं…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न युग के बारे में है। जैसे हम पढ़ते हैं, चार युग होते हैं– सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। और जो एक युग होता है उसको लगभग लाखों वर्षों का मानते हैं। जबकि एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) के अनुसार जो स्टार्स (तारों) की पोजीशन (स्थिति) है,…

प्रश्नकर्ता: आत्मा और अहंकार ये सारी इंटेलेक्चुअल लेवल (बौद्धिक स्तर) पर समझ में आती हैं। लेकिन अनुभव के स्तर पर कहीं-न-कहीं हम इनको एक तरीक़े से मान रहे हैं, जान नहीं पा रहे अन्दर से कि हम आत्मा हैं। ये परिवर्तन कैसे हो?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं समझना होता, जीना…

Questioner: Namskar Acharya ji. Pardon me for not remembering exactly but in one of the shivirs where we had read ‘Gospel of Sri Ramakrishna’ to come to terms with this expression called ‘Adhikar Bhed.’
So therein Ramakrishna was saying that, “now in modern times there cannot be any Adhikar Bhed,…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मैं पिछले दो-तीन महीने से अध्यात्म में हूँ। थोड़े समय से बिलकुल सही चल रहा था, जब तक मन और बुद्धि पर काम हो रहा था तो ज़्यादा डर नहीं था, पिछले हफ़्ते कुछ ऐसा हुआ कि बहुत ज़्यादा डर लगने लगा। मैं जिनसे सीख रही…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई सालों से अध्यात्म के साथ हूंँ, लेकिन फिर भी एक खालीपन महसूस होता रहता है, इससे बाहर कैसे निकलूंँ? कृपया मार्गदर्शन कीजिए।
आचार्य प्रशांत: मैं आपको इतना बताए देता हूंँ कि खेल बिलकुल आपके हाथ में है। बात यहांँ ग्रह-नक्षत्रों, चांँद-तारों की बिलकुल नहीं है कि…

प्रश्नकर्ता: अगले प्रश्नकर्ता आपके साथ गोवा शिविर में भी थे और वहीं से ही वे उद्धृत करते हैं। आपने कहा था, ‘आदमी वास्तव में जान जाए उनके ऊपर कौन है। तो आगे लिखते हैं कि आचार्य जी, इस बात को मैं कैसे समझूँ और जान पाऊँ कि ज़िन्दगी निजी भोग…

प्रश्नकर्ता: मेरे विचार से एक व्यक्तिगत संसार होता है और एक सामाजिक संसार होता है। और मेरी आयु वर्ग में — 21 से 30 वर्ष की आयु के बीच जहाँ पर आदमी के के सामाजिक संसार को दो हिस्सों में बाँट दिया जाता है — रिश्ता (पर्सनल लाइफ़) और कैरियर…

प्रश्नकर्ता: मन क्यों हमेशा सुरक्षा की तलाश में लगा रहता है? क्या हैं मन के सदा असुरक्षित अनुभव करने के कारण? मैं तो अध्यात्म में, आप में और शिविर इत्यादि में भी सुरक्षा की तलाश कर रहा हूँ कि संसार में सुरक्षा न मिली तो सत्य में मिल जाए। मैं…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं हंसराज कॉलेज का छात्र हूँ, कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेन्ट (संगणक विज्ञान विभाग) से। मेरे मन में एक प्रश्न है, जहाँ पर मैं दुविधा से भरा हुआ हूँ, कि मेरा इस बार अन्तिम वर्ष है और मैं कॉलेज से पास आउट हो (निकल) जाऊँगा। तो मेरी फैमिली…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, आपने कहा था कि ग़लती ‘मैं’ भाव से आती है। तो इसके साथ ही अक्सर हम अपनेआप को ये तर्क देते हैं कि मुझसे ये ग़लती हो गयी, ये मैं नहीं थी। तो ये ‘मैं’ भाव क्या है? और ग़लती किसको कहा जा रहा है तब?…

प्रश्नकर्ता: मेरा शरीर यादों से भरा हुआ है। यहाँ तक कि मैं अपने बालों के रंग, अपनी आँखों के रंग को भी स्मृति ही कहूँगा। और ये स्मृतियाँ मुझे पुरानी पीढ़ियों से मिली हैं क़रीब-क़रीब विरासत के तौर पर।
तो हम इन मेमोरीज़ को, स्मृतियों को फॉरमैट कैसे कर सकते…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी मेरे मन में जो है सैक्स (यौन क्रिया) से सम्बन्धित बहुत विचार आते हैं तो उन्हें कैसे कम या नियन्त्रित कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: ज़िन्दगी यूँ ही छोटी है, उसमें किसी ऐसे काम के लिए तुम समय कहाँ से निकाल रहे हो, जो तुमको पता है…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा प्रश्न विज्ञान से सम्बन्धित है। तो काफ़ी समय से वैज्ञानिक समुदाय और प्रकृति में एक तरीक़े का एक तकरार चल रहा है और काफ़ी हद तक विज्ञान सफल भी हुआ है, कोविड वैक्सीन का उन्होंने निर्माण किया और शायद प्रकृति की जो योजना थी उसको…

Acharya Prashant: Desire means that you are not alright with yourself and you want something else to happen, correct? So, we are anyway not living for ourselves. We are rather living to change ourselves. And are these not two very different things? If you are living for yourself as you…

आचार्य प्रशांत: अगर हमारे बीच वास्तव में कोई रिश्ता है तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगा कि आप वैसे ही कोई ज़िन्दगी जी रहे हो जैसे कोई आम आदमी जीता है। मुझे अपनेआप पर और अपनी बात पर घिन आएगी। आप अगर कहते हो आप दो साल से मेरे साथ…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आप हमेशा बोलते हैं कि ऊँचे उद्देश्य रखने चाहिए जिससे कि उसमें किसी भी तरीक़े का कोई डेविएशन नहीं होता है। अब ऊँचे उद्देश्य रखने की सामर्थ्य और साहस नहीं मिल पाता है क्योंकि अपनेआप को बहुत जगह मैं बेहोश पाता हूँ। कभी कुछ चीज़े साफ़…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न मेरे वैवाहिक जीवन से है। किसी भी अन्य रिश्ते में मुझे अभिव्यक्ति करना सरल लगता है पर अपनी बातें अपनी पत्नी तक पहुँचाना बहुत ही कठिन लगता है। यह रिश्ता इतना गहरा है फिर इतनी मुश्किल क्यों?
आचार्य प्रशांत: अब तुम्हें यहाँ पर एक…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुझे कर्म में कोई विश्वास नहीं है, भक्ति में कोई श्रद्धा नहीं है। मुझे धर्म की कोई समझ नहीं है, तो परमात्मा की कृपा मुझ पर होगी या नहीं? परमात्मा से मेरा कभी साक्षात्कार होगा?
आचार्य प्रशांत: तो अभी जैसे भी हो तुम, उससे अगर संतुष्ट ही…

प्रश्नकर्ता: जो अभी जिज्ञासा है मेरी आचार्य जी, यूट्यूब पर एक शॉर्ट्स देखा था, उसके सम्बन्ध में है। तो एक बहुत सुप्रसिद्ध व्यक्ति जो श्रीमद्भगवद्गीता पर बोलते हैं उनका वह शॉर्ट्स देखा था; काफ़ी चल रहा है, बार-बार मेरे फीड पर आया। तो वो निष्काम कर्म पर बोल रहे थे…

आज्ञाभयसंशयात्मगुणसङ्कल्पो बन्धः ।
ājñābhayasaṁśayātmaguṇasaṅkalpō bandhaḥ
Bondage is to imagine that Ātman has qualities like doubts, fear, etc.
~ Niralamba Upanishad, Verse 25
✥ ✥ ✥
Acharya Prashant (AP): “Bondage is to imagine that Ātman has qualities like doubts or fear etc. Bondage is to imagine that Ātman has doubt or…

Questioner: I have a question on an excerpt from you.
“Aloneness is not about being free of others and living without others. Aloneness is to live without oneself. Aloneness does not have much to do with the so-called others; aloneness has everything to do with the one called oneself.”
I’d…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, सबसे पहले तो आचार्य जी आपको कोटि-कोटि धन्यवाद, मेरी और मेरी माताजी की तरफ़ से।
मेरी माताजी सन् २०२० से आपको सुनती आ रही हैं। उनका खोया हुआ हौसला, आत्मविश्वास और मानसिक सम्बलता, जो खो गयी थी, वो आपके वीडियो के माध्यम से वापस आयी है।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। आचार्य जी, पिछले एक साल से आपको सुन रहा हूँ और आपकी अनुकम्पा से ग्रन्थ भी पढ़ने शुरू किये हैं तो अभी प्रतिदिन कुछ नया सीखने को मिलता है, मन बिलकुल लगा रहता है और जैसा पहले चला करता था, उससे बिलकुल बदल गया है जीवन।…

Acharya Prashant: Everybody in his own personal way is seeking fulfillment and that is love. If you are young you may seek fulfillment in somebody's body, if you are middle-aged you may seek fulfillment in wealth and prestige, if you are old you may seek fulfillment in security and property…

प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते। आपसे मैं सर्वप्रथम शास्त्र-कौमुदी नामक कोर्स (पाठ्यक्रम) के जरिए जुड़ा था, तब से मुझे वेदांत और ग्रंथों का मूल्य पता चला। मैंने प्रस्थानत्रयी का पाठ शुरू किया है, तीन महीने हो गए हैं। मुश्किल हो रही है समझने में, पर आनंद आता है। कोरोना के कारण घर…

आचार्य प्रशांत: आप जो चाहो, जिसको चाहो, दिखा सकते हो, कैमरे का मतलब ही होता है झूठ। कैमरे का तो मतलब ही झूठ है।
प्रश्नकर्ता: और ये सब कंटेंट (सामग्री) बनाया भी जा रहा है, फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच (अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता)। वो बोल रहे हैं कि ये फ़िल्म बनाना हमारी …

Acharya Prashant: Man bows down to only two things, you know—either to fear or to beauty. Today the world has neither of these. There is very little to be afraid of, you know. If the Earth is being destroyed, you can colonize another planet. “So, don’t worry, we will fly…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। आचार्य जी, मेरा क्वेश्चन (प्रश्न) डर को लेकर है। अभी तीन दिन मैंने यहाँ वालंटियरिंग (स्वयं सेवा) की; दिन अच्छे गुजरे; मज़े में निकल गये। लेकिन अभी ‘मीट द मास्टर’ के लिए यहाँ पर मैसेज (संदेश) रिकॉर्ड करना था।मेरा काफ़ी मन था आगे आकर बोलने का…

Acharya Prashant (AP) All the diversities that you see are the world. And these diversities are what make the mind suffer and here the sages have picked up all the diversities and have said that all these diversities are actually one. The distinctions are merely apparent. Actually, there is an…

आचार्य प्रशांत डिप्रेशन तब तक नहीं हो सकता जब तक अपनेआप को बहुत मजबूर अनुभव न करो। और मजबूर हम नहीं होते, मजबूर हमें हमारी अन्धी कामनाएँ बनाती हैं। अन्यथा कोई मजबूर नहीं है। कामनाओं में भी कोई दिक्क़त नहीं है, अगर वो अन्धी न हों। जो कामना आपको अन्धेरे…

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी।…