
कुरबाणु कीता तिसै विटहु, जिनि मोहु मीठा लाइआ ॥ – गुरु नानक
आचार्य प्रशांत: “कुरबाणु कीता तिसै विटहु, जिनि मोहु मीठा लाइआ” – मैं उस पर कुरबान जाता हूँ जिसने मोह को मीठा बना दिया है।
मोह हमेशा कड़वा होता है। मोह का अर्थ है अपने से बाहर किसी से…










मुंदा संतोखु सरमु पतु झोली धिआन की करहि बिभूति ॥ ~ पौढ़ी (जपुजी साहिब)
अनुवाद: संतोष को वैसे ही मन के समीप धारण करो जैसे कुंडल, विनय को ऐसे साथ लेकर के चलो जैसे तुम्हारा भिक्षा पात्र, और ध्यान को देह पर लगाने वाली भस्म।

प्रश्नकर्ता: सर, यहाँ पर बोल रहे हैं कि;
बाय हिज़ कमांड बॉडीज़ आर क्रिएटेड; हिज़ कमांड कैन नॉट बी डिसक्राइब्ड।




वक्ता: नानक कई बार कहते हैं कि वो जिसको चुनता है उसी पर अनुकम्पा होती है। तो सवाल है कि वो किसको चुनता है। हम इसपर कई बार बात कर चुके हैं।
वो किसको चुनता है?


संजोगु विजोगु दुइ कार चलावहि लेखे आवहि भाग। ~ जपुजी साहिब (नितनेम)
आचार्य प्रशांत: फ़्री विल (मुक्त इच्छा) भी एब्सोल्यूट्ली फ़्री (पूर्णत: मुक्त) है। आपकी जो फ़्री विल है, वो भी इस मामले में तो बाउन्डेड (सीमित) है ही कि वो आपकी नहीं है। जो आपकी इच्छा है वो तो…
वजाइया वाजा पउण नउ दुआरे परगट कीए दसवा गुपतु रखाइआ।। ~ नितनेम (अनंदु साहिब)
आचार्य प्रशांत: ‘आनन्द साहिब’ से है कि उसने शरीर के वाद्य यन्त्र में साँस फूँकी और नौ द्वार खोल दिये लेकिन दसवें को छुपाकर रखा। दसवाँ द्वार कौनसा है? कौनसा हो सकता है दसवाँ द्वार? मन…
Question: Acharya Ji, Pranaam! While reading and meditating on Nitnem, something happened within me which is difficult to explain. And this happening is same while we were reading Ashtavakra Gita and Upanishads.
These words do not create any images, but they take away my chains and cut me down. Whatever…
एह वसतु तजी नह जाई नित नित रखु उरि धारो ॥
Ėh vasaṯ ṯajī nah jāī niṯ niṯ rakẖ ur ḏẖāro.
This thing can never be forsaken; keep this always and forever in your mind.
Raag Mundaavanee, Fifth Mehl
Rahras Sahib, Nitnem (Guru Granth Sahib, Page 1429)
Question: Pranaam…
ऊडे ऊडि आवै सै कोसा तिसु पाछै बचरे छरिआ ॥Ūde ūd āvai sai kosā ṯis pācẖẖai bacẖre cẖẖariā.The crane flies hundreds of miles, leaving its young one behind.
तिन कवणु खलावै कवणु चुगावै मन महि सिमरनु करिआ ॥३॥Ŧin kavaṇ kẖalāvai kavaṇ cẖugāvai man mėh simran kariā. ||3||…
sir sir rijak sambaahay thaakur kaahay man bha-o kari-aa.
~ Rehraas Sahib, Fifth Mehala (Nitnem)
The Lord and provides sustenance to everyone, then why should you worry my mind?
~ Rehraas Sahib, Fifth Mehala (Nitnem)
सिर सिर रिजक सम्बाहयठाकुर कहाय मन भाओ करीआ
~ रहरास साहिब, पाँचवा महला…
अउध घटै दिनसु रैणारे ॥मन गुर मिलि काज सवारे ॥१॥ रहाउ ॥जा कउ आए सोई बिहाझहु हरि गुर ते मनहि बसेरा ॥
~ राग गौरी पूरबी, पाँचवा महला, सोहिला साहिब
Translation:
The life passes day and night.My mind, meet the Guru so that he sets things right.…
जो किछ कराय सो भला कर माने-ई हिकमत हुक्म हुक्म चुकाइये
~ तिलांग, पहला महला, शब्द हज़ारे (नितनेम)
Those God-Oriented people will tell that to attain God, we should accept as good whatever He does, and stop our own cleverness and will.
~ Tilang, 1st Mehla, Shabad Hazare (Nitnem)
Question:…
ਕਰਮੀ ਆਵੈ ਕਪੜਾ ਨਦਰੀ ਮੋਖੁ ਦੁਆਰੁ ॥
karmee aavai kaprhaa nadree mokh du-aar
By good karma, the Saropa, which is this body, the robe of honor, is obtained, and by His kindness, the door to salvation opens.
~ Guru Granth Sahib 2-5 (Japji Sahib, Nitnem)
✥ ✥ ✥
Questioner (Q):…
गोबिंद मिलण की इह तेरी बरीआ ॥Gobinḏ milaṇ kī ih ṯerī barīā.This is your chance to meet the Lord of the Universe.
अवरि काज तेरै कितै न काम ॥Avar kāj ṯerai kiṯai na kām.Other efforts are of no use to you.
मिलु साधसंगति भजु केवल नाम…
आयहू हर रस कर्मी पाइआ सतगुर मिलाई जिस आय
~तिलांग, पहला महला, शब्द हज़ारे ( नितनेम)
The Essence: Name of the Lord, His love, is obtained by good luck, good deeds,
when the True Guru: the True Master, meets and tells you to recite the Name of God.
~ Tilang,1st…
गुर परसादी हरि मंनि वसिआ पूरबि लिखिआ पाइआ।।
~ नितनेम (अनंदु साहिब)
बाइ गुरुज़ ग्रेस द लॉर्ड अबाइड्स विदिन द माइंड, एंड वंस प्री-ऑर्डेंड डेस्टिनी इज़ फ़ुलफ़िल्ड।
“गुरु के अनुग्रह से ईश्वर मन में बसता है, और व्यक्ति पूर्वनिर्धारित नियति को प्राप्त कर लेता है।”
प्रश्नकर्ता: ग्रेस (अनुग्रह) और प्री-ऑर्डेंड…
विणु गुण कीते भगति न होई। अर्थ: बिना गुण के भक्ति नहीं हो सकती। (जपुजी साहिब)
आचार्य प्रशांत: आप दीवार के पास बैठे हैं और आप ऊँघ जाते हैं और आपके सिर पर दीवार लगती है ज़ोर से। क्या आप दीवार से कहते हो कि कमीनी मेरे ही घर की…
दुख विसारणु सेविआ सदा सदा दातारु ~ शबद हज़ारे (नितनेम)
मैं उसकी सेवा करता हूँ, जो मेरे सारे दुखों को विस्मृत कर देता है और जो सदा-सदा से देने वाला है।
आचार्य प्रशांत: मैं उसकी सेवा करूँगा, करता हूँ, जो मेरे सारे दुखों को विस्मृत कर देता है और जो…
”हुकमी हुकमु चलाये राहु।” ~ जपुजी साहिब
आचार्य प्रशांत: वो अपने हुक्म से राह पर चलता है। राह तो सामने ही है। जहाँ खड़े हो, वहीं से चलती है। हुक्मी स्वभाव ही है, तो कहीं दूर जाना नहीं है पूछने। हुक्म तब भी उल्टा-पुल्टा हो जाता है, क़दम फिर इधर-उधर…
सभ महि जोति जोति है सोइ
सब में प्रकाश है
~ सोहिला (नितनेम)
आचार्य प्रशांत: कल दोपहर जब हम लौट रहे थे कॉलेज से तो गाड़ी में कृष्ण कुछ बातें कह रहे थे, फिर मैंने सी.डी. प्लेयर बन्द कर दिया। जब तक वो जो कह रहे थे, वो चल रहा…
तव चरनन मन रहै हमारा॥
अपना जान करो प्रतिपारा॥
~ चौपाईसाहब (नितनेम)
अर्थात, हे! अकाल पूरक, अपना हाथ देकर मेरी रक्षा करो। मेरी मन की यह इच्छा आपकी कृपा द्वारा पूरी हो कि मेरा मन सदा आपके चरणों में जुड़ा…
हुकमी हुकमु चलाये राहु।
~ नितनेम
आचार्य प्रशांत: वो अपने हुक्म से राह पे चलाता है। राह तो सामने ही है। जहाँ खड़े हो वही से…
आचार्य प्रशांत: बात बहुत सीधी है, गुण वह सब कुछ है जो किसी भी चीज़ के बारे में, घटना के बारे में, इंसान के बारे में कहा जा सकता है, वह गुण है׀
जिस किसी वस्तु, व्यक्ति के साथ आप…
वक्ता: उस सौभाग्यशाली घर में पाँच शब्दों का वादन रहता है। न होने से, होने का जो बदलाव है, वो गतिमान हो जाने का बदलाव है। वो गति में आ जाने का बदलाव है। जब तक गति नहीं है, पदार्थ भी नहीं है।…
वक्ता:जो हासिल किया नहीं जा सकता, जो बात दुष्प्राप्य है, वो भी सुनने से हाथ आ जाता है। जो तुम्हें अन्यथा कतई न मिलता, वो सुनने से मिल जाता है। क्या आशय है?
श्रोता1: सुनने से कुछ मिलेगा की जगह इसको ऐसे…
उसने शरीर के वाद्य यंत्र में सांस फूंकी और नौ द्वार खोल दिए लेकिन दसवें को छुपा के रखा।
प्रश्न है कि दसवां द्वार कौन सा है? कौन सा हो सकता है दसवां द्वार?
मन का है। नौ द्वार हैं शरीर के जो बाहर…
वक्ता: सवाल यह है कि ‘तुम’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, ‘तुम्हीं विद्यमान हो,’…
“मनु ताराजी चितु तुला तेरी सेव सराफु कमावा”
~ नितनेम (शबद हज़ारे)
वक्ता: मन तराज़ू, चित तुला है — ‘मन’ तराज़ू है, ‘चित’ तुला है, और ‘तेरी सेवा’ वो कमाई है जो सर्राफ़ा इस पर तोल-तोल कर करता है। नानक के यहाँ पर पुश्तैनी काम यही था। अब तो पढ़…
~ जपुजी साहिब
वक्ता: सुनने वाले को काल नहीं पा सकता। कबीर ने भी कहा है ये और जितने सरल तरीके से कबीर कहते हैं उतने ही सरल शब्दों में कि,
काल-काल सब कहें, काल लखे…
सर, तो जो आदेश आपके शरीर को बना रहा है…
आचार्य प्रशांत: आपका शरीर…
अनुवाद: हमारे परमपिता सर्वसामर्थ्यवान हैं प्रत्येक कर्म करने के लिए तो क्यों हम मन से उन्हें भूल जाते हैं?
वक्ता : सभना गला समरथु सुआमी सो किउ मनहु विसारे
किउ विसारे। क्यों विस्मृति में जाते…
(Without the true love of devotion, the body is without honour)
वक्ता: शरीर किसलिए है? दो शब्दों में शिवसूत्र स्पष्ट कर देते हैं। शरीर क्या है? हवि है। शरीर यज्ञ की ज्वाला में समर्पित होने हेतु पदार्थ है। यज्ञ क्या? यज्ञ वो…
रहससि साहिब (नितनेम)
वक्ता: नानक कह रहे हैं कि जो कौन्शिअस (सचेत) मन होता है, – विचारशील मन – वो दृश्यों में और ध्वनियों में चलता है। तो उसको उनहोंने इंगित किया है ‘चित्र’ से। और जो छुपा हुआ मन…
वक्ता: हाँ। ज़्यादा…
~ जपुजी साहब
(The faithful have intuitive Awareness and Intelligence)
वक्ता: पश्चमी दार्शनिक – स्पिनोज़ा, उसने एक शब्द प्रयोग किया है – इनटियूटिव प्री-अंडरस्टेंडिंग (सहज ज्ञान युक्त पूर्व समझ)। उसने कहा वही असली चीज़ है। कोई भी बात समझ में उसे ही आती है…
अनदिनु साहिबु सेवीऐ अंति छडाए सोइ ॥
~ नितनेम (शबद हज़ारे)
आचार्य प्रशांत: “अनदिनु साहिबु सेवीऐ अंति छडाए सोइ”
दो बातें यहाँ पर साफ़-साफ़ समझो। ‘अंत’ से यहाँ पर आशय, समय में अंत नहीं है। हम ‘अंत’ का मतलब समझते हैं – समय में आगे का कोई बिंदु। अंत से…
वक्ता: उसकी अपनी कोई इच्छा होती नहीं। परमात्मा की अपनी कोई इच्छा नहीं है। इच्छा का अर्थ ही होता है- ‘अपूर्णता’। इच्छा का अर्थ ही होता है- ‘लक्ष्य’ और ‘खालीपन’। परमात्मा कोई इच्छा कर सकता ही नहीं।…
जिन मिलिया प्रभु आपणा, नानक तिन कुबानु॥ ~ गुरु नानक
आचार्य प्रशांत: मन का एक कोना मन के दूसरे कोने पर न्यौछावर है। एक मन है और दूसरा मन है, और दोनों की अलग-अलग दिशाएँ हैं। नानक कह रहे हैं, ऐसा मन जो प्रभु की दिशा में है, प्रभु पर…
अनुवाद: मौन धारण करने से मन चुप नहीं होता और ना ही प्रभु से मिलाप होता है , चाहे मन लगातार ध्यान में लगा रहे!
वक्ता: चुपै चुप ना होवई, इसमें हमें कोई समस्या नहीं हैं| बात…
सुणि सुणि मेरी कामणी पारि उतारा होइ ॥२॥
(श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी, अंग ६६०)
वक्ता: सुणि सुणि मेरी कामणी पारि उतारा होइ|
सुन-सुन कर मैं पार उतर गयी| सुन-सुनकर पार उतर गयी| (‘सुन’ शब्द पर ज़ोर देते हुए)
क्या अर्थ है इसका? सुन-सुनकर तर गयी|
सुनने का अर्थ है-…
वक्ता: मंदिर से जो घंटे, घड़ियाल, ढोल, नगाड़े की आवाज़ आ रही है; वो ‘अनहद’ शब्द है | घंटा जैसे बजता है, अच्छा है | शब्द वही अच्छा जो जब बजा तो ऐसे बजा जैसे चोट करी हो, और फिर क्योंकि…
We have all put down a book that could have helped us, or dozed off halfway through something that mattered. A man who could not keep food down was given medicine, and he threw that away too, since it went in by the same route. Most of us strike a similar deal: we move into a place that stinks and, within a week, call the smell normal. Show our fifteen-year-old self the life we lead now and they would scoff. What would change if we admitted we do not like our condition?

किसी के मुँह से सुनते ही कि उसे सच मिल गया है, हम उसके पीछे चल पड़ते हैं, जेब भी ढीली कर आते हैं। फिर हम जैसे दो-चार लोग मिलकर एक-दूसरे को दिलासा देते हैं कि हमें भी मिल गया। पर जो सबसे ऊँचा है, वह जेब में डालने की चीज़ नहीं। जो उसे छूने निकला है, वह अभी पूरा बचा हुआ है, और छूते ही उसे अपनी कहानी का पात्र, अपना औज़ार बना लेता है। जिसका सच से सचमुच नाता है, उसकी ज़बान तो नाम लेने में भी काँपती है। तो हम सच खोज रहे हैं, या अपने झूठ को देखने से बच रहे हैं?


भगत सिंह कहते थे "बहरे कानों तक अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए अक्सर धमाकों की ज़रूरत पड़ती है।"
लेकिन उनको कहाँ पता था कि लोगों की स्मृति इतनी कमज़ोर है कि उनके जाने के बाद वे सिर्फ़ उनका 'धमाका' ही याद रखेंगे। और उनको भूल जाएँगे, उनके संघर्ष…

🔥 “मैं तुम्हें प्यार से लूटने आया हूँ” 🔥
देश को आज़ाद हुए 4 साल ही हुए थे, और 75% आबादी कृषि संबंधित कार्यों से जीवनयापन कर रही थी।
लेकिन एक बहुत विचित्र बात थी: कृषि क्षेत्र में काम कर रहे अधिकतर लोगों के पास अपनी ज़मीन ही नहीं…

How many hours do you spend meditating each day?
This is a trick question!
Whether you are “meditating” one hour per day or six, you are not truly meditating. This is because meditation is not something you do to escape life. Meditation is a way of life.
Meditation is to…

Love is great. Love is necessary. Love is beautiful.
But what is love?
For most of us, love is the greatest excitement and comfort—and also the greatest suffering. Whether love has become a problem or something you cherish the most in your life, please go deeper into the matter. Know…

राष्ट्रों का निर्माण किसी समाज की परिष्कृत बुद्धिमत्ता से होना चाहिए था, लेकिन वे सामूहिक अहंकार का दर्पण बन जाते हैं। व्यक्ति जो अपनी संपत्ति के साथ करता है, राष्ट्र वही GDP के साथ करता है—जो गिना और तुलना किया जा सके, उसे योग्यता का प्रमाण मान लेता है। हम इसे समझदारी कहते हैं, फिर आश्चर्य करते हैं कि व्यक्ति और देश दोनों सदा घिरे हुए क्यों महसूस करते हैं, मानो विश्राम करना निषिद्ध हो।