
✍🏻 पोस्ट 4 | 10 अक्टूबर '26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ────────── 🌼 जब कविता ने समाज की मान्यताओं को चुनौती दी 👀 किसी को ऊँचा और किसी को नीचा मान लेना कितना आसान है! किसी की जाति, भाषा या सामाजिक पहचान देखकर उसके बारे में राय बना लेना और फिर उसी राय को सही मानते रहना। सदियों से चली आ रही व्यवस्था को हम अक्सर बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते हैं। ❓ लेकिन क्या पुराना होने से कोई विचार सही हो जाता है? 📚 *कुमारन आशान: साहित्य से सामाजिक चेतना तक…


































