
वो लड़की जो कभी सिकुड़कर रहती थी, जो सिर से पाँव तक सजी रहती थी, जिसे हर कदम पर दुनिया की नज़र का ख़याल रहता था— आज वही लड़की थोड़ी-सी आवारा हो गई है। अब उसे सजने से ज़्यादा बिखरने में खुशी मिलती है। अब चेहरे पर बनावट कम और एक सच्ची-सी मुस्कान ज़्यादा है। शायद जब इंसान अपने भीतर का सच्चा प्रेम खोज लेता है, तो वह दुनिया को खुश करने की कोशिश छोड़ देता है। वह बस वही करने लगता है जिसमें उसका दिल सचमुच धड़कता है। मैं विज्ञान की विद्यार्थी थी। पौधों…











































