
एक मंदिर ऐसा भी…… एक ऐसा मंदिर, जिसमें कोई मूर्ति नहीं, जिसमें कोई पुजारी नहीं। एक ऐसा मंदिर, जो किसी परलोक की बात नहीं करता, न किसी आसमानी लोक का वादा करता है। एक ऐसी जगह, जहाँ परमात्मा किसी कल्पना में नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में साक्षात उतरता हुआ दिखाई देता है। और सबसे खास उस मंदिर को बनाने वाला। जिसने अपने पूरे जीवन को तपस्या बना दिया, जिसने घोर संघर्षों के बीच अपने जीवन का एक-एक क्षण इस मंदिर की नींव में रख दिया। उस मंदिर को बनाने मे…












































