
Ankit Giri
HIDP में जाना और वहाँ बिताए गए पल और वहाँ के अनुभव मेरे लिए केवल बीती हुई यादें नहीं होंगे। वे ऐसी अमूल्य स्मृतियाँ बनेंगे, जो समय-समय पर मुझे अहंकार के विगलन, स्वयं को देखने और मुझे सही दिशा में लौटने की याद दिलाती रहेंगी। जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं। प्रेम गली अति साँकरी, तामें दो न समाहिं॥ ~संत कबीर साहेब जी
















