
सबके भीतर ऊंचाई की प्यास बेहतर होने का ईमानदार प्रयास। इस WEEKEND की HIDP – एक तीर्थ की तरह... -------- जहाँ सही संगति मिल जाए वही जगह तीरथ है ~ आचार्य जी🙏🙏

सबके भीतर ऊंचाई की प्यास बेहतर होने का ईमानदार प्रयास। इस WEEKEND की HIDP – एक तीर्थ की तरह... -------- जहाँ सही संगति मिल जाए वही जगह तीरथ है ~ आचार्य जी🙏🙏

✍️ HIDP प्रतिभागी एक्टिविटी के बाद अपना अवलोकन साझा करते हुए। ऐसा विश्वविद्यालय यहीं देखने को मिलता है! 🔥 जहाँ छात्रों ने पहले जमकर गहन मुद्दों पर चर्चा की, कुछ असहमतियाँ भी सामने आईं। लेकिन अंत में, सब एक साथ बैठकर अपना अवलोकन लिख रहे हैं। 💭📝 जो समझा, जो जाना, जिसने झकझोरा, जिसने सोचने पर मजबूर किया, सब कुछ इन अवलोकनों में उतर रहा है। बहुत कुछ हुआ, बहुत कुछ खुला और बहुत कुछ नए सिरे से देखने को मिला। ✨ सबसे बड़ी बात, इस पूरी प्रक्रिया में हम…

अवलोकन: पिछले दो दिनों से HIDP का जो ढाँचा देख रहा हूँ, या सभी HIDP में जब आपस में चर्चा होती है, तर्क-वितर्क होता है, तो कम्युनिटी में एक सहजता दिखाई देती है, जो मैंने कहीं और नहीं देखी है। तो आचार्य जी की बात याद आ जाती है कि हम कोई व्यवस्था बनाने नहीं आए हैं, बस जो व्यवस्थाएँ पहले से हैं, उन्हें बदलने आए हैं। तो मैं लोकतंत्र को एक व्यवस्था की तरह यहाँ देख रहा हूँ, जिसका मूल आधार ही यहाँ बदल गया है। यहाँ चर्चा, बहस और विचार-विमर्श में कोई…

SUNDAY WITH HIDP GROUP DISCUSSION शुरू... 🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆

गोवा में एक महीने से ज़्यादा डेरा डालने के बाद अब मैं दिल्ली आ रही हूं वापस सत्रों का और HIDP का साथ पाने के लिए। पिछली बार दो टिकटें कैंसिल करानी पड़ीं क्योंकि मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरा स्वास्थ्य मुझे इतनी छूट दे पाएगा। और हुआ ये कि मैं वहां ज्यादा स्वस्थ रही, तन-मन दोनों से। इस बार रिटर्न टिकट ही नहीं कराई है और 1 महीने के लिए जगह बुक कर ली है। सत्रों का और HIDP का लंबा साथ पाने के बाद ऐंवेइ (बिना किसी मकसद की) संगति अब, जीवन को जैसे बर्दाश…

मेरे पास कुछ नहीं है कहने को आचार्य जी, मैं बस कृतज्ञ हूँ कि आपने मुझे अपने इतने पास आने का मौका दिया, आपने मुझे किसी लायक समझा । आपने ही समझाया कि कमज़ोर नहीं हूँ , एक आप ही हो केवल मेरी ज़िंदगी में जिसने वास्तव में प्रेम किया है मुझसे । वो प्रेम जो और कुछ नहीं चाहता मुझसे बस यही चाहता है कि मैं बेहतर जिंदगी जीकर जाऊं , जितना ऊँचा उठ सकता हूँ उतना ऊँचा उठ जाऊं इससे पहले कि काल अपनी गोद में बिठा ले । और बाकी सब जो प्रेम का दावा करते हैं उनके पास…

HIDP गोवा में सहभागी होना मेरे लिए एक अत्यंत समृद्ध और परिवर्तनकारी अनुभव रहा। ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से जो समझ और ज्ञान प्राप्त होता है, HIDP में उसे प्रत्यक्ष रूप से जीने और गहराई से अनुभव करने का अवसर मिला। वहाँ का वातावरण, साथियों की उपस्थिति और आचार्य जी के संदेशों पर सामूहिक चिंतन ने सीख को और अधिक जीवंत बना दिया। विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर स्वयं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला। सबसे मूल्यवान अनुभव यह रहा कि मुझे अपने प्रश्न सीधे…

एक अवलोकन 🪞🏝️ गोवा के आखिरी HIDP प्रोग्राम और सत्र में शामिल हुई, यह मेरे जीवन के खास पलों में से एक था, यहां अतिशयोक्ति नहीं कर रही हूं सच में😊 क्योंकि मैं सत्र से कुछ दिन पहले भीतरी अंतर्द्वंद था क्योंकि मैं गोवा पहली बार जा रही थी लेकिन जैसा मेरे मन में विचार चल रहा था उसका उल्टा हुआ। वहां जब मै गीता प्रतिभागी से मिली तो एक भी पल ऐसा नहीं लगा कि मैं इन्हें नहीं जानती।हम सब की सोच कितनी मिल रही थी। हम लोग स्कूटी से सत्रों में जाते और बाकी…

WWM | Day 1 ⚡ A very intuitive act. They started with funny act and this was the ending. 😳 Genuinely amazed by the range. Most of us realize our mistakes a little too late. #HIDP #WWM

दिल्ली NCR में वापस HIDP एक्टिविटी शुरू हो चुकी हैं। प्रतिभागी सुबह 9:00 बजे ही एक्टिविटी के लिए पहुँच चुके हैं। सभी एक्टिविटीज़ में मज़े कर रहे हैं, नई-नई चीज़ें सीख रहे हैं और अभी प्ले की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही आप लोगों के साथ नया वीडियो शेयर करेंगे। 👉🏻 सभी सत्रों के रजिस्ट्रेशन लिंक: https://acharyaprashant.org/en/upcoming-events?cmId=aplive-allevents

ये रिश्ता क्या कहलाता है ❤️ Back To Weekend With Master 🥰 Hidp_11 #hidp #Aplive

Welcome Back To School Weekend With Master HIDP 11 #HIDP_11 #WeekendWithMaster

दो महीने अविस्मरणीय, ऊँची संगत और निरंतर ख़ुमारी गोवा में होने का फ़ायदा मुझे पिछले 3,4 सालों से आचार्य जी की शारीरिक उपस्थिति और सत्रों के आयोजन से अद्भुत रूप से मिला है। अगस्त, सितंबर 2026 में ख़ूब सत्र हुए। सत्रों में शामिल हुआ, स्वयंसेवक के रूप में काम किया। बहुत सारे नए-पुराने गीता प्रतिभागी मिले, बहुत सीखा और अथक मेहनत में भी भरपूर आनंद 😊। वास्को दा गामा से सत्र स्थलों तक की सारी यात्राएँ बाइक पर की। 24 घंटे काम किया ताकि दूसरा दिन सत्…

आज मैं राहुल नाम के बेटे का किरदार निभा रही थी। मैं एक मम्मी हूँ, लेकिन इस एक्टिविटी में मैंने खुद एक बेटे का रोल प्ले किया। यह मेरे लिए बहुत ही अलग और अनोखा अनुभव था। इससे मुझे समझ आया कि हम अपने चरित्र और किरदार को अलग-अलग परिस्थितियों में कितनी तरह से निभा सकते हैं। आज HIDP की एक्टिविटी करके मुझे बहुत अच्छा लगा। वहाँ बहुत से लोगों से मिलने और उनसे बात करने का मौका मिला। उनसे बात करके मुझे काफी नई चीज़ें जानने और समझने को मिलीं। मुझे यह भी…

कई दिनों से मन में था कि गोवा में चल रहे सेशंस में पहुँचूँ। छुट्टी के लिए यूनिट में काफी समय से बात कर रहा था, लेकिन छुट्टी मिल नहीं पा रही थी। आखिरकार ज़रूरी काम बताकर, जैसे-तैसे छुट्टी sanction कराई और जम्मू से दिल्ली पहुँचा। वहाँ से सीधे गोवा के लिए निकल पड़ा। 26 तारीख की सुबह लगभग साढ़े आठ बजे मड़गाँव स्टेशन पहुँचा। स्टेशन से बाहर निकलते ही मन में सेशन तक पहुँचने की जल्दी थी। इसी भाग-दौड़ और विचारों की उथल-पुथल में ट्रेन में अपना कुछ सामान ह…

A whole month spent only in sessions, beaches, book stalls, HIDP, bhajans, and unending learning. This month in Goa, the sessions have slowly brought many things closer to my heart. I met many new people here and found them to be good friends and, more than that, family. They understood me, helped me, and gave me good company. We went to many places here: Netravali Forest, a beautiful beach, a beautiful waterfall, Mangeshi Temple, and another t…

पहला HIDP 🏝️ आखिर कर मैने गोवा में होने वाले आखिरी hidp के लिए फ्लाइट ले ली हैं। कुछ दिनों से भीतरी अंतर्द्वंद चल रहा था कि वहां क्या होगा , नए लोग होंगे , नई जगह है आदि आदि। लेकिन अब मुझे अच्छा लग रहा है। कि मैने hidp में शामिल होने का सही फैसला लिया 😊

🌿 Goodbye, Little Man! Holistic Individual Development Program (HIDP), Goa में हमने Wilhelm Reich के ‘Little Man’ पर आधारित नाट्य-प्रस्तुति दी। इसे करते हुए मैंने अपने भीतर उस ‘लिटिल मैन’ को देखा, जो अपनी खुशी के लिए किसी व्यक्ति, सेलिब्रिटी, संबंध या बाहरी स्वीकृति पर निर्भर है। मैं उसे अपने साथ गोवा लाया था। वह पूरी तरह समाप्त हो गया है, यह दावा नहीं; पर अब उसकी पहचान होने लगी है—शायद यही विदाई की शुरुआत है। उम्मीद है, लौटते समय सामान साथ होग…

धन्यवाद आचार्य जी। में GOA पहली बार आई और वो भी सिर्फ HIDP के लिये, वो भी अकेले नहीं। मेने इतने सत्र नहीं सुने थे पर जोभी सुना वो मुझे खींच लाया गोवा तक। आज पहला दिन था HIDP एक्टिविटी का जो गुडबाय, लिटिल मैन!" (Goodbye, Little Man!) जो प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विल्हेम रीच (Wilhelm Reich) के निबंध 'लिसन, लिटिल मैन!' (Listen, Little Man!) पर आधारित था। अलग अलग ग्रुप में हमने ये एक्टिविटी की और बहुत कुछ सीखने को मिला । यह मुख्य रूप से आत्म-जा…

मेरी गोवा तक की यात्रा... गोवा जाने से पहले मन में बहुत उथल-पुथल थी क्या होगा, क्या नहीं होगा। मैं कितनी फालतू बातें सोच रही थी। लेकिन वहाँ पहुँचकर अनुभव बिल्कुल अलग रहा और बहुत अच्छा रहा। मैं अकेले यात्रा कर रही थी और मुझे अपने भीतर कुछ सहज-सा लग रहा था। पहले जैसी बेचैनी और जल्दबाजी मैं अपने भीतर नहीं देख रही थी। मैंने देखा कि गोवा जाने से पहले मेरी स्थिति क्या थी और गोवा से वापस आने के बाद मेरी स्थिति क्या है। अब मैं देख पा रही हूँ कि मैं क…

Goa में 8 दिन कैसे बिता पता ही नहीं चला । समुद्र किनारे घंटों बैठे रहना, HIDP, भजन, भजन के साथ मस्त होके नाचना, फिर सत्र के गहराई में डूब जाना ,सत्र की रोशनी से खुद के अन्धकार (अज्ञान) को देखना और समझना, अनजान लोगों से मिलना और उनसे बात करके ऐसे अनुभव होना जैसे उन्हें बहुत पहले से ही पहचानती हूँ। आचार्य जी आप से हमें जो परिवार मिला है वह बहुत ही अनूठा है, क्युकी हमारी जो तथाकथित परिवार है उसमें स्वार्थ के ही संबंध होते हैं, लेकिन इस परिवार में…

आचार्य जी का धन्यवाद, जिन्होंने हमें हमारे पुराने अनुभवों और सोच से बिल्कुल अलग एक नई दुनिया को देखने का अवसर दिया। नेपाल से इतनी दूर गोवा की यात्रा करने के बारे में सोचना भी मेरे लिए अविश्वसनीय था। मुझे गोवा की संस्कृति, वहाँ के लोगों की सिविक सेंस, साफ-सफाई, जीवन की गुणवत्ता, विभिन्न धर्मों के सह-अस्तित्व और प्राकृतिक सुंदरता को देखने का मौका मिला। मैंने वहाँ पहली बार समुद्र देखा। मैं नोएडा बुकस्टॉल टीम के साथ था। वे बहुत हँसमुख और साथ ही समझ…

How does real suffocation 😵💫 feel like? Ever since I arrived in the UAE, I haven't missed my family, India, my home, or anything else as much as I miss Acharya Ji. The suffocation I feel here is so terrible and unbearable 😞 that honestly, I don't think words are enough to capture the entirety of it. There is something inside me that keeps longing to go back, to sit there again, to listen again, to participate again, to simply be there again. 🥺…

WWM के 3 दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला। यह 3 दिन सच कहूं तो मेरे लिए अलग ही दिन थे। कुछ सवाल भीतर लेकर गयी थी। सोचा था मौका मिला तो आचार्य जी से पूछ लूँगी। पर पूछने कि ज़रूरत नहीं पडी। पहले ही दिन HIDP एक्टिविटी में जवाब मिल गया। दूसरे दिन की HIDP एक्टिविटी और बात चित ने दिखा दिया कि मैं जो भी निर्णय ले रही हूँ वो कहाँ से आ रहा था। मैं क्यों अपनी बेटी को लेकर इतनी protective होती हूँ, life में सब sorted रखना चाहती हूँ वो सब बातों बातों में बाहर…

About fifteen days ago, after a lot of inner turmoil and a strong longing to go, I finally decided to go to Goa. I had wanted to go ever since Acharya Ji started holding sessions there. But for many reasons and most of all, because of finances, I kept stopping myself. I kept thinking, “It will cost too much. Going there is simply not possible.” But about fifteen days ago, something stirred deeply within me. I felt, “Whatever happens, I have to…