
सुनो, आज कुछ कहना चाहता हूँ मैं उनसे, जो मुझे सुनते हैं। मैं पूछ रहा हूँ, जवाब दो— क्या सच में तुम मुझे सुनते हो? अगर सच में कुछ सुना है तुमने मुझसे, तो क्या कुछ बदला है जीवन में? अगर जैसे थे, वैसे ही हो, तो कहाँ सुना तुमने मुझे? मैं कितना बोलता हूँ, यही सोचते हो न तुम? सच तो यह है कि मुझे मौन पसंद है। मुझे बोलना पसंद नहीं है। फिर भी मैं इतना बोलता हूँ, क्योंकि तुम्हें देखता हूँ तो भीतर कोई कहता है— "जो जाना है, वह इन्हें दे दो। ये भी तुम…




























