
✍️ पोस्ट 18 | 10 अक्टूबर '26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ────────── 🎖️ 14 साल का 'टेगरा': सुविधा का पिंजरा बनाम आज़ादी की मौत 📜 22 अप्रैल 1930 की शाम, चटगांव के पास जलालाबाद की पहाड़ियों पर ब्रिटिश सेना की अंधाधुंध गोलियाँ बरस रही थीं। मास्टरदा सूर्य सेन के नेतृत्व में शस्त्रागार पर धावा बोलने वाले क्रांतिकारियों में एक 14 वर्षीय किशोर भी शामिल था हरिगोपाल बल, जिसे सब प्यार से 'टेगरा' बुलाते थे। अपने बड़े भाई लोकनाथ बल के साथ वह नन्हीं उम्…













































