
Harmit
एक 14 साल के बच्चे में जो आग थी वो हमारे भीतर नहीं है हम अपने स्वार्थ के लिए 80 साल की व्यर्थ जिंदगी जीने वाले हैं समाज और मान्यताओं ने इतना डर भर दिया है कि भीतरी भले ही दुख हो हम समझोता करते रहते हैं. भीतर जो दुख बना हुआ है उसे हवा आचार्य जी ने दी है ताकि आग जल सके.
















