
kumari rani
हमें लगता है कि हम इस दुनिया में मौज करने आयें हैं,पहला तो आयें नहीं।दूसरा यहां जो है उसे हमारे भोगने के लिए ही बनाया गया है। लोकधर्म के पंजे में सब स्वार्थी बन जाते हैं,हम अपने और अपनों के लिए कुछ करते हैं।इतनी कठिनाइयों के बाद हमें आजादी मिली। लेकिन हम उसका सम्मान करना नहीं जानते या चाहते। आधुनिकीकरण की होड़ में भारत का आम आदमी खुद को ही खो बैठा।















