
Sumit Gupta
उस डरी हुई जिंदगी मै लोगों को अच्छा लगने लगा है तो क्या करे लोग तो जिंदगी कट रहे है बस जी थोड़े रहे है 🙏🙏🙏
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उस डरी हुई जिंदगी मै लोगों को अच्छा लगने लगा है तो क्या करे लोग तो जिंदगी कट रहे है बस जी थोड़े रहे है 🙏🙏🙏

सुमित जी, आपने खुद लिख दिया, कटना और जीना दो अलग चीज़ें हैं। टेगरा के पास पंद्रह बरस भी पूरे नहीं थे, और वो जी गया। हम पचास साल काट देते हैं और जीने का मौका टलता रहता है। तो सवाल ये नहीं कि डर लगा हुआ है या नहीं, सवाल ये है कि जिस दिन डर सामने आया, उस दिन आपने घुटने टेके या सीना तान लिया। वो एक पल ही बताएगा कि आप काट रहे हैं या जी रहे हैं।