
✍🏻 पोस्ट 14 | 23 सितम्बर '26 💭 विषय — फ़िल्में/गीत/पुस्तकें/कला ───────── 🎬 कागज़ के फूल: ख़ूबसूरती है, पर ख़ुशबू नहीं 1959 की फ़िल्म कागज़ के फूल में गुरु दत्त ने सुरेश सिन्हा नाम के एक सफल फ़िल्म निर्देशक की कहानी दिखाई है। एक समय था जब सुरेश की फ़िल्में चलती थीं। लोग उसे जानते थे। उसकी कला का सम्मान करते थे। उसकी बात सुनी जाती थी। लेकिन समय बदला। फ़िल्में असफल होने लगीं। प्रसिद्धि कम होती गई। रिश्ते टूटते गए। और जिन लोगों के लिए क…














































