
मैंने ऐसे कईं विषयों से दिल लगाया जिनके बदल जाने पर मानों मुझे आसमान से गिरा दिया हो : चाहे मेरे खेत खलिआन, मेरे गांव के वो स्थान जहाँ मैंने बचपन बिताया; जिन दोस्तों के साथ रहा और उसके बाद सेना की नौकरी और फिर वहाँ से भी विदाई। पूरा का पूरा दर्द का भारी सैलाब समेटे हुए एक ऐसी पीड़ा के साथ जी रहा था जो किसी से कही नहीं जा सकती। लेकिन फिर भी उम्मीद नहीं टूट रही थी।तब आचार्य जी जीवन में आए नहीं थे तो और दूसरी चीजों को इकट्ठी करके उस खालीपन को भरने…
















