
Sandhya Verma
हम अक्सर चीज़ों को खोने से नहीं डरते। हम डरते हैं कि उनके बिना हम अपने बारे में क्या सोचेंगे। इसलिए कभी-कभी इंसान सफलता को नहीं बचा रहा होता— वह अपने अहंकार की बनाई हुई तस्वीर को बचा रहा होता है। और यही “कागज़ के फूल” का आईना है। फूल को बचाने की चिंता कम है; फूल होने की छवि को बचाने की चिंता ज़्यादा है। 🙏😔















