
Ishika sharma
कभी भी उस क्षणभंगुरता को नहीं देखते । बस उसके पीछे भागते जा रहे हैं ये मिल जाए। क्योंकि इस में मै की पहचान चली जाती है कि जिससे अहंकार बर्दाश्त नहीं कर सकता। उसको चोट लगती है क्योंकि इसकी पहचान जब तक रहती है तब तक ठीक लगता है।
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