यह तो सही बात है कि कागज़ के फूल सुंदर दिखाई दे सकते हैं पर उनमें सुगंध नहीं होती।" मै "…
Post
1 comment
Meena Kumari Meena
यह तो सही बात है कि कागज़ के फूल सुंदर दिखाई दे सकते हैं पर
उनमें सुगंध नहीं होती।" मै " को बचाने के लिए हम अनेक ऐसे काम भी करते रहते है जो हम वास्तव में करना भी नहीं चाहते
लेकिन सम्मान , पहचान को बनाए रखना जरूरी लगता है
क्योंकि हम अपने आप को समाज, परिवार से जोड़ने हेतु यह कार्य
करते हैं
मीना जी, आपने खुद लिखा है, ऐसे काम जो हम वास्तव में करना भी नहीं चाहते। यहीं रुककर देखिए, यह जो न चाहते हुए भी करना है, यह मजबूरी नहीं लगती, ज़रूरी लगती है। समाज और परिवार से जुड़ने की दलील असल में उस काम को सही ठहराने का काम कर रही है जिसे आप खुद ग़लत जानती हैं। जिसे बनाए रखने के लिए मन के ख़िलाफ़ जाना पड़े, वह रिश्ता समाज से कम और अपनी छवि से ज़्यादा है। इसे एक बार पहचान लेने भर से आगे का रास्ता खुलता है, आचार्य जी के सत्रों में इसी गाँठ पर बार बार लौटा जाता है, वहाँ देखना सहज हो जाता है।
---
आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें।
https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401