✍🏻 पोस्ट 11 | 25 सितंबर '26💭 विषय — लोकधर्म─────────
🩺 2 फिंगर टेस्ट
🌍 कई समाजों में महिलाओं की वर्जिनिटी जाँचने के नाम पर उनके शरीर, विशेषकर हाइमन, की जाँच की जाती रही है। कभी इसे विवाह, चरित्र या परिवार की “इज़्ज़त” से जोड़ दिया जाता है।
⚠️ लेकिन विज्ञान इस धारणा का समर्थन नहीं करता। WHO के अनुसार हाइमन की बनावट या किसी भी तरह की चिकित्सकीय जाँच से यह साबित नहीं किया जा सकता कि किसी महिला ने यौन संबंध बनाया है या नहीं।
📰 हाल के…
महिला को इंसान समझा नहीं जाता इससे भी ज्यादा बड़ी प्रॉब्लम यह है कि अगर कोई महिला खुद को इंसान समझने की कोशिश करती है तो उस पर उंगलियां उठाई जाती हैं एक साधारण स्त्री के लिए बहुत मुश्किल होता है ऐसी सिचुएशन में अपना मानसिक स्वास्थ्य बनाए रख पाना
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Shikha
अहंकार द्वारा बनाई चीजों को ही देखते है
जैसे मैं या कई लोग आचार्य जी को सुनते है तो कुछ लोगों के घरवाले सुनने से मन करते है जैसे मेरी मम्म जो है वो कहती है ना जाने क्या सुनती रहती है लेकिन कहीं न कही उन्हें पता ही है कि मैं सही चीज सुन रही हु वो बहुत ज्यादा बंधन में ही रहना पसंद करती फाइनेंशियल independence लेकिन वैसे आज़ाद नहीं है किसी ने कुछ कह दिया उसको सोच सोच के खुद का दिमाग ख़राब करना ओर साथ में ये बोलना कि मेरी किसी को पढ़ी ही नहीं ये अब चलता रहता है
मैं बस कहना इतना चाहती थी कि कुछ लोगो के घर वालों मन करते है ये अब मत सुना करो तो कई बार आचार्य जी को शिकायत करते है कि मेरे घरवाले सुनने नहीं देते एक जैसे कि मेरी घर में कोई मिल्क छोड़ने को राजी नहीं है तो ये भी आचार्य जी नहीं ही बताया कि
" आप क्यों किसी से उम्मीद करते है कि वो आपको समझे उन्होंने जो इतने सालों जिन्नधारों पर चले उन्हें छोड़ते उन्हें दुख तो होगा ही लेकिन वो उस व्यक्ति के ऊपर ही निर्भर करता है कि वो करेगा कैसे हर चीज का इस्तेमाल करेगा तो आपको कोई शि काम से रोक रहा तो उसे से मुंह माफ बनाने लगिए उसे समझाइये अगर आप सच में कुछ अच्छा के रहे हो बाकी हर व्यक्ति स्वतंत्र तो है ही आपकी तरह "
🙏🙏
Ravina
dhanyvad Aacharya ji aapane mujhe Aankhen di duniya Ko dekhne ke liye
Aacharya Ji ko sunane ke bad mujhe ab pata chalta Hai ki log mujhse is tarike ki baat kyon kar rahe hain aur kya chahie unko mujhse
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Vimla Patel
मैं कई बार सोचती हूं कि आखिर इनकी जड़ें इतनी गहराई में बैठी है कि कितना ही समझा ले हम इन चीजों को ,लोग मानना ही नहीं चाहते कि स्त्री कोई उपभोग की वस्तु नहीं हैं वह स्वयं में स्वतंत्र है , उसका शरीर है फिर क्यों उसपर किसी और का इतना अधिकार हो जाता हैं,क्यों उसकी ना का सम्मान नहीं किया जाता ,कई बार घृणा होती है ऐसी सोच और ऐसे लोगों से । पुरुष महिलाओं को केवल देह ही क्यों मानता है , क्यों उसे लगता है कि विवाह का अर्थ है कि उस स्त्री की देह को उसने खरीद लिया है 😖
Sonam
कैसे कोई तय कर सकता है?
किसी को कोई अधिकार नहीं होता है कि किसी भी महिला की निजता पर बोले चाहे कोई भी हो ।
Anjali
Yes, this happens with me. I associate the person near me or in my close circle as mine.
I regard them as such and due to this I discriminate between them and other.
Here this separation comes because I see them different because they were associated with “me”
Here I am considering myself different therefore anything associated with me has to be different!
But how I am any different??
Shivani
उदाहरण इसकी हम जो अभी जमुई में घटना होती है। जो गलत है । उसे हम गलत स्वीकार ही नहीं करते । उल्टा उसका चरित्र देखने बैठ जाते है । चरित्र भी वो जो समाज ने बनाए हुए है । ओर बोल भी ज्यादा महिलाएं ही रही है । उस लड़की के चरित्र को ले कर । स्त्री की पहचान इस कदर उनके अंदर बैठ चुकी है ओर इस समाज द्वारा बैठा दी गई है । जो साफ साफ दिख भी रहा है । अपराध है उसे भी उस समाज की बनाई झूठी ओर गन्दी पहचान से माप रही है । क्या बन गए है हम । सच में एक जिंदा लाश के इलावा कुछ भी नहीं है ।
Iram ahmad
किसने दिया यह हक़?
औरत की वर्जिनिटी जाँचने का हक़ किसी ईश्वर ने नहीं दिया, किसी धर्म ने नहीं दिया, किसी प्रकृति ने नहीं दिया। यह हक़ हमने ही समाज को दिया है अपनी चुप्पी से, अपने डर से, अपनी स्वीकृति से।
जिस दिन स्त्री यह कह दे कि “मेरे शरीर का प्रमाणपत्र किसी को नहीं दूँगी,” उसी दिन इस तथाकथित इज़्ज़त का बाज़ार ढहने लगेगा।
प्रेम का संबंध विश्वास से होता है, जाँच से नहीं। जहाँ परीक्षा माँगी जा रही है, वहाँ प्रेम नहीं मालिकाना हक़ छिपा बैठा है।
🙏आचार्य जी की शिक्षा यही याद दिलाती है कि *दासता बाहर से कम, भीतर की स्वीकृति से ज़्यादा चलती है।* जिस दिन स्वीकृति समाप्त होगी, अन्याय भी टिक नहीं पाएगा.
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Sangita mote
जाँच उस स्त्री के शरीर की नहीं, बल्कि उस पुरुष की सड़ी हुई, अज्ञानी चेतना और बीमार मान्यता की हो रही है जो उसे जाँचने निकली है।
Priti kumari
आचार्य जी से मिलने के बाद मै को देख पाना एंड अहंकार को पीछा छोड़ने की यात्रा पर हु।
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JITESH KUMAR TELI
शरीर की नहीं उस मान्यता की जो बाहर से थोपी गई है।
Niharika Neha
jab kisi mahila ki is tarah ki jach ki jati hai to jach karvane vala hi apne bare me hi bata rha hota hai .in sabse bahar nikalne ke liye mahila ko khud hi sanghsh karna hoga.sabse pahle hame apne pairo par khara hona hoga.
sarita Chauhan
हर बात घूम-फिरकर महिला और यौन संबंधों तक ही क्यों पहुँच जाती है? चाहे वह जबरदस्ती किया गया बलात्कार हो, विवाह के भीतर का संबंध हो या समय के साथ बना कोई रिश्ता हर जगह शोषण, चरित्र, वर्जिनिटी, इज़्ज़त, लाज और लज्जा जैसे शब्द सामने आ जाते हैं।
लगता है जैसे इन शब्दों की पूरी शब्दावली ही महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई हो। लेकिन आखिर क्यों?
शोषण हुआ तो सवाल महिला के चरित्र पर क्यों?
बलात्कार हुआ तो उसकी इज़्ज़त और लज्जा की बात क्यों, अपराधी की जिम्मेदारी की बात पहले क्यों नहीं?
विवाह हुआ तो महिला की पवित्रता और वर्जिनिटी क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
रिश्ता टूटा तो महिला के चरित्र पर सवाल क्यों उठते हैं?
और लाज-लज्जा का बोझ भी बार-बार महिला के हिस्से में ही क्यों आता है?
आखिर ये शब्द और सामाजिक मानदंड , आज भी इन्हें इतनी मजबूती से क्यों ढोया जा रहा है? सवाल सिर्फ महिलाओं का नहीं है सवाल यह है उसकी देह और उसके यौन व्यवहार को उसकी पूरी पहचान क्यों बना दिया गया?
Dibya Ranjan Panigrahi
🪞 और अपने जीवन में भी देखिए: क्या मैं सामने वाले इंसान को वास्तव में देख रहा हूँ, या अपने अहंकार की बनाई हुई उसकी तस्वीर को?
🌿🌿 मैं जब मेरी मां को देखती हूं तो मैं मेरी मां कि उस चेहरा को देखती हूं जो मेरी अहंकार के द्वारा बनाया हुआ है। जैसे कि यह मां है और इनका काम है घर में रह कर खाद्य पदार्थ बनाना और घर में सब लोगों को खाने केलिए देना ऐसे बहुत सारे मान्यताओं जुड़ी हुई है उस अहंकारी तस्वीर से।
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pooja sahoo
मैं अपनी इस तरह की दृष्टीकोण से परेशान हूँ, कहीपर भी कोई लडकी दिखे तो मैं उसके कपडे, बात चित को अप ने नजरों से नापने लगती हूँ, सहज होकर नहीं देखपाती ।
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Jitan Kumar
यहां स्त्री को इंसान समझने की वजाय वस्तु या धन की तरह देखा जा रहा हैं
Vaibhav Nagre
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : "गुलाम को अगर उसकी गुलामी का अहसास करा दिया जाए, तो वह खुद अपनी बेड़ियां तोड़कर विद्रोह कर देगा।"
महिलाओं को 'गुलामी का अहसास' करवना होगा
महिलाओं पर सदियों से थोपी गई रूढ़ियों और सीमाओं को सामान्य जीवन मान लिया गया है। इस मानसिक गुलामी से मुक्त होने के लिए उन तक आचार्य जी विचार पोहचाना होगा, 💪
ANKIT RAJ
Ahankar etna adhura hota hai ki vastuye to choriye kisi insan ko bhi own karna chahta hai phir wo uspe apni maanyataye bhi thopta hai.
Mukesh
-जाँच उस मान्यता की जो उसे जाँचने निकली है।
-मैं अपने अहंकार की बनाई हुई उसकी तस्वीर को।
-क्यों और किस लिए यह प्रश्न क्यों नहीं उठाए गए क्योंकि समझ नहीं है तथा अहंकार कमजोरी के रूप में मजबूत होकर बैठ जाता है।
Baban Yadav
ये सब हमारी समाज की गन्दी सोच है लोग अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तब उनको ओर होगा हम सोचते ही नहीं किसी बात को अंधे की तरह पालन करने लगते हैं यही हमारी सबसे बड़ी गलती है।
हमें बेहतर समाज बनाना है तो लोगों में वैज्ञानिक सोच को विकास करने में मदद करना होगा लोगों को शिक्षित करना होगा
हमारे आचार्य जी दिन रात लगे रहते है लोगों को जगाने में लेकिन हम इतने बुरे लोग हैं कि उनके साथ भी नहीं चलते।
Akanksha Mishra
ऐसी मान्यताओं पर लगता है क्या लिखूं नहीं ऐसी सरकार बंद करवा सकती है और ना ही जिसके ऊपर में हो रहा है कहीं ना कहीं सब उसके सपोर्ट में रहते हैं जब कोई स्त्री शिक्षित होगी अपने दम पर कुछ करने के लायक होगी तभी वह अपने लिए कुछ फैसला ले सकती है वरना यह समझ में कभी कुछ ना कुछ मान्यताओं के लिए किसी ना किसी तरीके से ही कुछ ना कुछ करता रहता है ।शादी से पहले रोका जाने वाला पढ़ाई लिखाई हर चीज को लेकर फिर शादी के बाद बच्चों को लेकर भेदभाव इतना ज्यादा हमारे समाज में इतनी सारी चीज होती रहती हैं कि लोग क्या कहेंगे इन सब के बारे में सोचते ही जीवन निकल जाता है आचार्य जी की वजह से तो कम से काम नहीं समझ में आने लगा है कि गलत है या सही है पर क्या कर सकते हैं ऐसे दल-दल में फंस जाते हैं कि निकलना आसान ही नहीं होता है।
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RADHA RAY
नमस्ते आचार्य जी जब तक स्त्री अपने को देह मानते रहेगी पढ़ेंगी नहीं अपने लिए संघर्ष नहीं करेगी अपने पैरों पर खड़ा नहीं होगी पुरूषों और समाजों के हांथ कि खिलौना बनी रहेगी तब तक इससे भी बढ़कर उसके साथ बदसलूकि होते रहेंगी ऐसे समाज और मान्यता हटाना होगा और ये तब संभव होगा जब स्त्री अपने लिए लड़ना सिखेगी धन्यवाद
Manisha
यहाँ जांच लड़की की नहीं मान्यताओं की हो रही है
यहाँ अहंकार का बहुत गहरा चाल है, गहरी मान्यताएं है, लोकधार्मिक बात है, यही लड़का के बारे मैं कहाँ कोई जांच करने का जिक्र लोकधर्म करता है.
RITU SHARMA
ये सब पुरुष सत्ता के दिमाग की उपज है, ख़ुद चाहे जो कुछ भी कर रहे हो महिला पूरी तरह वर्ज़न चाहिए 🤨🤨🤨
Rudra
🪞 और अपने जीवन में भी देखिए: क्या मैं सामने वाले इंसान को वास्तव में देख रहा हूँ, या अपने अहंकार की बनाई हुई उसकी तस्वीर को?
उत्तर:
अभी भी बहुत हद तक, मैं स्त्री को, एक चेतना की तरह और इंसान देखने से पहले भी देह की तरह ही पहली छवि बनती है,
पर अब देख पाता हूँ, अपने ही नजरों पर, कि वो देह से पहले एक चेतना है, एक मनुष्य है।
चुनाव है, कि अपने इस नज़र पर नज़र रखूँ।
ये आचार्य जी के शिक्षाओं से ही संभव हो पा रहा है।
Harmit
एक स्त्री भी ये जाँच करवाने को तैयार हो जाती है, क्यों?😢
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Manisha Kumari
इससे से यह पता चलता है कि जांच महिला के शरीर का नहीं हो रहा है समाज की मान्यता का हो रहा है ।
Rekha Yadav
मान्यताओ कि जांच होती है
Sunita
👉मेने अपने जीवन मे देखा है, मे ज़ब भी किसीको देखती हूँ, तो यही सब अहंकारीक पहचना के साथ क्युकी पहले की मान्यता जों हमें बताई गयी, की लड़की की इज्जत उसके उसी (वजाइनल) हिसे मे है, तब मेने भी शरीर को बड़ी बात माना और इसे हमेसा सुरक्षित रखने का फैसला किया, और किसीसे भी नही ज्यादा मिलती जुलती थीं,क्युकी मुझे वही डर मेरे अंदर था, की इज्जत जों मेरे शरीर को बड़ा बना रहीं थीं। मे पता नही कहा थीं, हूँ क्युकी जैसे मुजे बताया गया, वैसे ही उसी नजर से दूसरी लड़कियों को देखती थीं, और अब भी देखती हूँ, पर अब मुझे समझ आ रहा है, की ये सब हमारे अहंकार की चाल है। जों एक अहंकार दूसरे अहंकार पर किस तरह की शर्ते लगता है। अपने आप को विशिष्ट बनाय रखने और विशिष्ट दिखाने के लिए। और अब मुझे पता चला की वो किस तरह अपने आप को किसी कहानी मान्यता और स्वामित्व और मेरी इच्छा के अनुसार हमें पकड़े हुए है। जिसका परिणाम डर है। जों अपने आप को बचने की कोशिस मे कैसे किसी विषय की और भेज देता है। उसकी सच्चाई जानने को,और अपने आप को बचाय रखने को (अनदेखा )।
Vaishali
Samaj abhi bhi mahilao ko keval sampati aur bhog ki vastu samjhata h . isiliye vah isse bahar nhi a pata ki vah sharir nhi pahle ek chetna h uski bhi apni marzi h jisme vo apne nirnay le sake .
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✍🏻 पोस्ट 11 | 25 सितंबर '26 💭 विषय — लोकधर्म ───────── 🩺 2 फिंगर टेस्ट 🌍 कई समाजों में…