
Vimla Patel
मैं कई बार सोचती हूं कि आखिर इनकी जड़ें इतनी गहराई में बैठी है कि कितना ही समझा ले हम इन चीजों को ,लोग मानना ही नहीं चाहते कि स्त्री कोई उपभोग की वस्तु नहीं हैं वह स्वयं में स्वतंत्र है , उसका शरीर है फिर क्यों उसपर किसी और का इतना अधिकार हो जाता हैं,क्यों उसकी ना का सम्मान नहीं किया जाता ,कई बार घृणा होती है ऐसी सोच और ऐसे लोगों से । पुरुष महिलाओं को केवल देह ही क्यों मानता है , क्यों उसे लगता है कि विवाह का अर्थ है कि उस स्त्री की देह को उसने…















