
RADHA RAY
नमस्ते आचार्य जी जब तक स्त्री अपने को देह मानते रहेगी पढ़ेंगी नहीं अपने लिए संघर्ष नहीं करेगी अपने पैरों पर खड़ा नहीं होगी पुरूषों और समाजों के हांथ कि खिलौना बनी रहेगी तब तक इससे भी बढ़कर उसके साथ बदसलूकि होते रहेंगी ऐसे समाज और मान्यता हटाना होगा और ये तब संभव होगा जब स्त्री अपने लिए लड़ना सिखेगी धन्यवाद




























