
Shikha
अहंकार द्वारा बनाई चीजों को ही देखते है जैसे मैं या कई लोग आचार्य जी को सुनते है तो कुछ लोगों के घरवाले सुनने से मन करते है जैसे मेरी मम्म जो है वो कहती है ना जाने क्या सुनती रहती है लेकिन कहीं न कही उन्हें पता ही है कि मैं सही चीज सुन रही हु वो बहुत ज्यादा बंधन में ही रहना पसंद करती फाइनेंशियल independence लेकिन वैसे आज़ाद नहीं है किसी ने कुछ कह दिया उसको सोच सोच के खुद का दिमाग ख़राब करना ओर साथ में ये बोलना कि मेरी किसी को पढ़ी ही नहीं ये अब…















