
Rudra
🪞 और अपने जीवन में भी देखिए: क्या मैं सामने वाले इंसान को वास्तव में देख रहा हूँ, या अपने अहंकार की बनाई हुई उसकी तस्वीर को? उत्तर: अभी भी बहुत हद तक, मैं स्त्री को, एक चेतना की तरह और इंसान देखने से पहले भी देह की तरह ही पहली छवि बनती है, पर अब देख पाता हूँ, अपने ही नजरों पर, कि वो देह से पहले एक चेतना है, एक मनुष्य है। चुनाव है, कि अपने इस नज़र पर नज़र रखूँ। ये आचार्य जी के शिक्षाओं से ही संभव हो पा रहा है।















