✍🏻 पोस्ट 13 | 20 सितम्बर '26
💭 विषय — मानव उत्कृष्टता─────────
🏛️ शांति स्वरूप भटनागर: जिन्होंने केवल शोध नहीं, शोध की राह बनाई
🔬 कुछ लोग प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग परिणाम देते हैं।
और कुछ लोग ऐसा ढाँचा बना जाते हैं, जिसमें उनके बाद भी प्रयोग और परिणाम पैदा होते रहें।
👨🔬 डॉ. शांति स्वरूप भटनागर की कहानी इसी तीसरे स्तर की ओर इशारा करती है।उन्हें भारत में अनुसंधान प्रयोगशालाओं का “जनक” कहा जाता है। यह उपाधि केवल उनके वैज्ञानिक शोध…
मेरी यह सोच और कामना बस इतनी है कि मेरे रहने या न रहने से इस प्रक्रिया पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। मैं ऐसे सिद्धांतों की रचना करना चाहता हूँ और उन्हें समाज के साथ इस प्रकार जोड़ना चाहता हूँ कि यह व्यवस्था अनंत काल और अनंत जीवन तक बिना रुके निरंतर चलती रहे। मेरा यह सोचना और प्रयास बस इसी बात का परिणाम है कि सच्चाई, कर्तव्य और चेतना का यह प्रवाह कभी थमना नहीं चाहिए—चाहे मैं रहूँ या ना रहूँ।
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Lavanya
We may praise a person’s dedication, discipline and way of working. But should we automatically praise what that work ultimately served?
Why did Shanti Swarup Bhatnagar wanted to promote chemistry in India? Scientific progress is not automatically synonymous with human or ecological progress.
industrial use of chemistry has contributed to pollution, toxic substances, environmental degradation and the destruction of ecosystems.
To me, Peepal Baba’s work is therefore far more worthy of admiration—not because it is more famous or technically sophisticated, but because its purpose is directly connected with protecting and restoring the natural world.
Those who quietly work to save the Earth, even when their work is slow and they receive little recognition, deserve our deepest respect.
we should always ask how much of the Earth we are able to preserve by our work.
“Should we do it, and at what cost to nature?” is a question that every human should ask.
Meena Kumari Meena
यह सीमा में बंधे होय है कि समाज , परिवार ने जो पति पत्नी का रिश्ता बनाया है । उसे निभाना ही होगा नहीं तो बच्चे को कौन पालेगा । एकली लड़की समाज में रहना चाहे भी तो रह नहीं सकती
क्योंकि वह अपने जीवन का सही निर्वाह करने में सक्षम नहीं है
उसके पास कोई नौकरी भी नहीं है कौन पति के अलावा कमा के देगा । क्योंकि समाज ने लड़कियों को अकेले रहने की कभी आजादी दी ही नहीं। तो लड़की समाज परिवार के दबाव के कारण
अपनी पहचान पत्नी, मां तक ही सीमित कर रह जाती है
अपनी सीमा से बाहर निकले ही नहीं। यही बांधने वाले कार्य हैं।
Shreya
I have a belief about myself that I am lazy and I do nothing, these many years I really did nothing and also not have any clarity what to do even if I am graduated from last 3 years and unemployed. So many years habit of laziness make me feel and think about myself that I can not do anything in life. I try to do what is good work for me but ended up with procrastination and years passed like this.
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R
Rk
koi mujhe bta sakte ho exam dete h to uska result kaha dikhta h
Mukesh
अपने काम के दौरान अर्जित की गई उपलब्धियों को अधिकतर अवसर होने पर स्वीकृति हेतु उत्साह से वर्णित किया हैं परंतु प्राप्त उपलब्धि की आगे की संभावना हेतु क्या किया जा सकता था, कभी-कभी इसका विचार नहीं किया...और पढ़ें
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Aditya kumar pradhan
कमजोर हूं और कम बुद्धि वाला हूं।
इसे कभी देखा नहीं।
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Manish Sharma
यहीं कि मैं कमजोर हूं, और शारीरिक रूप से अस्वस्थ भी।
ये भी जानता हूं कि ये मेरे मन का जाल भर हैं लेकिन कभी इससे आगे आज तक निकल नहीं पाया।
कोशिश जारी हैं।
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Govind
कोई भी पहचान या अवधारणा की सीमा में बंध जाने से आगे बढ़ने की संभावना कम हो जाती है।
Shikha
mà aapni seems ki bediyo m kaid ho ho k ghut chuki hu m in seemao ko todne ka prayash kr rahi hu
Ravi Shankar Gupta
नॉलेज, जब भी सेशन अटेंड करता हु तो बात को लिख लेता हु और होता है कि ठीक है ये करना चाहिए पर वो दिनचर्या मे आता ही नहीं।
वो ज्ञान मानो मेरे लिए नहीं मै किसी और के लिए ले रहा हु।
एक ऐसी आइडेंटिटी जो ज्ञान तो ले रहा है पर जीवन मे उसे उतरने के बजाए बस इन्फॉर्मेशन की तरह स्टोर कर रहा है कर रहा है।
मुझे सब मालूम है, मै कर लूंगा मे ही रह जाता है कभी नहीं होता कि कर रहा हु।
पर कल कठोपनिषद के सेशन के बाद ये और समझ आई कि न ज्ञान, न प्रवचन, और न मेधा से होगा होगा तो देखने के साथ साथ इंटेंट।
Sheetal Kushwaha
Ahankar har samay apni pahchan hi chahta hai .
SONALI SONI
1. I am a Java software developer and I believe the the higher level coding is not my cup of tea, it can only be done by more experienced developers of this field.
2. I also believe I cannot learn DSA
3. I believe I cannot be a good communicator.
4. I believe I cannot build one IT company of my own.
5. I believe I cannot become a strong personality like Acharya ji.
But now onwards I am committed to work towards breaking my boundaries🪔🪷
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Rekha Chaturvedi
mujhme ek bat h jo mai nai smjh pati ki ye kahan se aati h,mai kuch v chahe wo koi v kam ho,Mai kehti hu kr lungi,wo kuch v ho skta h,ye himmat mujhme kahan se aati h nai pta,bs ye lgta h ki krte hm insan hi hn,to mai kyu nai kr paungi,sun leti hu kahin se v ki itni himmat kahan se lati ho,pr ye mujhe v nai pta,bs mere andr se aana chahiye ki ye kam sahi to h n,ek din Aacharya ji ko sun rhi thi jisme unki ek bat aisi lgiki kya hi btau,wo bolte hn kam ki kmi h,kahi kuch n milta h to bahar niklo dekho kahi kachara hi pda h to sfai kro,or har ghr se mehnt ki jaduri le lo,khud ko chlane k liye kitna hi Paisa ka jarurt h, Aacharya ji ki bate jaisi maine likhi h waise nai thi,pr jitna mai pakad pai unki baton ko apne sbdo me likh di,ho skti h mere sbd me gadbdi ho,pr jaise v mai unki baton ko smjhi wo baten hi bahut apneaap me thi.or sch to ye h ki mai kuch v kr skti hu sachchai k sath, Aacharya ji 🙏🙏
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Rupa Singh
अपनी वर्तमान पहचान से आगे जाने की संभावना को देख रही हूँ , और उसपे काम भी कर रही हूँ । मै फिलहाल सिर्फ एक हाउस वाइफ हूँ ,और उसके साथ Study भी चल रही है शुरू से एक अच्छी Student तो नही रही Economics में M.A करने के बाद मैने UGC NET की तैयारी कर रही हूँ 2 बार Exam दिए qualify नही हुआ , जैसे कि मैंने बताया अच्छी student नहीं हूँ पर फिर भी में लगी हुई हूँ । जैसे कि ' आचार्य प्रसांत जी '🙏कहते है जिस हालात में हो आगे बढ़ते रहो तो उनको सुननी से हिम्मत मिलती है ,कि रुकना नही हैं बेहतर होने कि कोशिश करती रहनी है।
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Manju jat
🙏
Namrata Vardhan
I did my Bachelor's in Chemical Engineering from Dr Shanti Swarup Bhatnagar University Institute of Chemical Engineering & Technology, Panjab University. We focused on learning technical knowledge but it is nice to read about him here.
Shilpee
जब कोई भी कार्य अपनी पहचान से हट कर सही गलत समझ के की जाये तो वह जिस भी क्षेत्र में हैं उसे और अच्छा कर सकता हैं....खुद की पहचान बनाने में लगा रहेगा तो सीमित ही रहेगा..
Pooja patel
क्या हम अपने काम को केवल अपनी पहचान का हिस्सा मानकर कर रहे हैं, या उसमें अपनी वर्तमान पहचान से आगे जाने की संभावना भी देख रहे हैं?
❓। में तो सिर्फ घर का काम करती हु। हाउसवाइफ पहचान मानकर लेकिन अब अपनी वर्तमान पहचान से आगे आगे जाने की संभावना को भी देख रही हु। ❓ आपने अपने बारे में कौन-सी धारणा ऐसी मान ली है, जिसे अब तक अपनी सीमा समझकर देखा ही नहीं? यही की में एक औरत हु तो अपनी मन मर्यादा में रहना घर की बहु हु और सिर्फ घर संभालना हे इस से आगे देखा ही नहीं
Sneha Khatik
chahe jo bhi paristhitiya ho apne ap ko shant rkhkar unka upay khojkar aage badte jana hia .
Arti Gupta
❓ आपने अपने बारे में कौन-सी धारणा ऐसी मान ली है, जिसे अब तक अपनी सीमा समझकर देखा ही नहीं?
📝 शायद एक सही और अच्छा बनने की धारणा ,एक ऐसी धारणा जो मुझे कभी कभी ये महसूस करती है कि मैं अब बाकी लोगों से अलग बन रही हु । लेकिन दूसरे ही क्षण ये देख भी पाती हूं🧐 कि अब ये गलत हो रहा है अब मेरा अहंकार केंद्र में बैठ के निर्णय कर रहा है खुद को विशेष बताने का ।🧐🧐
त्रिभुवन साहू
Yahi hahri kamjori hai aur ham apne tak har chij ko rakhna chahte hai aur svayam unkacredit lena chahte hai aur har chij bhogna chahte hai lekin ab se nahi aaj se nahi 🔥🥺
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Amisha khandey
कभी कभी और कहु तो रोज कुछ न कुछ ऐसे मौके आते है कि चली आ रही परंपरा और आचार्य जी की शिक्षाओं के बीच तकरार होती है और मैं अपने पक्ष में निर्णय चाहती हूँ और जब मेरी दलिले कम पड़ने लगती है और मुझे दिखने लगता है कि बात तो मेरी सही है मगर मैं सामने वाले को अच्छे से समझा नही पा रही हूँ तो लगता है कि शायद मुझमें ही कोई कमी है इसीलिये ना तो मैं पूरी तरीके से आचार्य जी को समर्पित हो पाती हुँ और जो मांयताएँ और परंपराएं चली आ रही है उन्हें भी मानने से इंकार कर देती हूँ।
Tarun Kumar
अभी हम अपनी काम दूसरों के पास करते हैं, उसमें अपनी कोई नाम पहचान नहीं है हम वहां नौकरी करते हैं। आगे की चाहत अभी बाकी है।
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Brahma kumari Rao
जो जीवन मैं जी रही थी उसे कभी मैने परखा ही नहीं , या यूं कहूं
परखना भी होता है यह तो पता ही नहीं था।मुझे तो लगता था कि बस यही है जीवन जो परिस्थितियों के कारण बन गया है, जो चल रहा था उसमें चैन भी नहीं था।लेकिन आचार्य जी से जुड़ने के बाद वास्तविक जीवन क्या है? यह समझ में आया और लगता है कि जो जीवन जिया वो तो व्यर्थ चला गया लेकिन अब शेष जीवन बोध से ही जीना है।
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Aaditya
मुझे नौकरी करना है ।
Prem Doyal
जब हम अपनी पहचान केवल अपने होने तक ही सीमित रखते है l तो जो हमें वास्तव में होना होता है, वह कही चूक जाता है l
Priyanshi Tw
वैसे तो बहुत सी सीमाएं हटी हैं सोच बदली है set होने की बात पहले अच्छी लगती थी अब नहीं ,लेकिन मैं किसी एक circle में घूम रही हूं लगता है कि बहुत आगे निकल चुकी हूं पर पाती हूं कुछ समझ बाद कि वहीं लौटकर आ गई हूं मैं अपनी लड़की वाली अपनी लड़की वाली पहचान से आजाद होना चाहती थी पर देखती हूं कि अभी भी अपनी आही सीमाओं में हूं
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Swati singh
अपने अहंकार की सीमा समझ कर देखी ही नहीं
RAVINA
मेरी, मेरे काम को लेकर यह धारणा बनी है कि मैंने जितनी मेहनत की है उसके अनुसार यह काम मुझे मिला है , और मैं यहाँ आकर रुक सी गई हूं और इसे ही अपनी सीमा मान ली है , पर यहाँ से आगे बढ़ना ही होगा।
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✍🏻 पोस्ट 13 | 20 सितम्बर '26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ───────── 🏛️ शांति स्वरूप भटनागर:…