
Ravi Shankar Gupta
नॉलेज, जब भी सेशन अटेंड करता हु तो बात को लिख लेता हु और होता है कि ठीक है ये करना चाहिए पर वो दिनचर्या मे आता ही नहीं। वो ज्ञान मानो मेरे लिए नहीं मै किसी और के लिए ले रहा हु। एक ऐसी आइडेंटिटी जो ज्ञान तो ले रहा है पर जीवन मे उसे उतरने के बजाए बस इन्फॉर्मेशन की तरह स्टोर कर रहा है कर रहा है। मुझे सब मालूम है, मै कर लूंगा मे ही रह जाता है कभी नहीं होता कि कर रहा हु। पर कल कठोपनिषद के सेशन के बाद ये और समझ आई कि न ज्ञान, न प्रवचन, और न मेधा से…















