
मेरी यह सोच और कामना बस इतनी है कि मेरे रहने या न रहने से इस प्रक्रिया पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। मैं ऐसे सिद्धांतों की रचना करना चाहता हूँ और उन्हें समाज के साथ इस प्रकार जोड़ना चाहता हूँ कि यह व्यवस्था अनंत काल और अनंत जीवन तक बिना रुके निरंतर चलती रहे। मेरा यह सोचना और प्रयास बस इसी बात का परिणाम है कि सच्चाई, कर्तव्य और चेतना का यह प्रवाह कभी थमना नहीं चाहिए—चाहे मैं रहूँ या ना रहूँ।
















