


मैं सोचता था महिषासुर और अन्य राक्षस को महामाया मारती हैं , पर अब समझ मैं आ रहा है कि महिषासुर बाहर नहीं मेरे अंदर है , जो मेरे कामना के माध्यम से प्रकट होता है हम हमेशा किसी को उसके कर्म के अनुसार देखते हैं कि वह अच्छा है या बुरा। हमारे पास अच्छाई का और बुराई का एक लिस्ट दिमाग मैं होता है। और उसी से हम तय करते है कि कोई अच्छा है या बुरा। पर दुर्गासप्तशती हमें सिखाती है कर्म नहीं करता को देखो। कर्...

दुर्गासप्तशती” को आमतौर पर लोग सिर्फ एक धार्मिक पाठ या पूजा-पाठ का हिस्सा मानते हैं। लेकिन इस किताब में इसे जिस तरह समझाया गया है, वह इसे सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि गहराई से मनोवैज्ञानिक और आंतरिक यात्रा बना देता है। किताब यह दिखाने की कोशिश करती है कि देवी-देवताओं और असुरों की कहानियाँ बाहर की घटनाएँ नहीं, बल्कि हमारे भीतर चल रहे संघर्षों का प्रतीक हैं। यह दृष्टिकोण काफी अलग है और कई बार पुराने वि...

I Have Earlier read this book about chetna as Maa for prakrti yesterday i came across a movie old hit movie VAASTAV where Raghus mother shot dead where he was pleading MAA MUJHE MUKTI DEDO MAA . where his mother told he was already dead because prakarti already took his control and was Seeking drugs anything prakarti would give him temperory and make him slave but before becoming that evil perso...

देवी वास्तव में कौन हैं, राक्षस कौन हैं और जिन ऋषि ने ये ग्रंथ लिखा वो हमें क्या संदेश देना चाहते थे ? बिना ये सब जाने देवी की पूजा करने से देवी का ही अपमान हैं। नवरात्रि और सभी त्यौहार एक अवसर होते हैं खुद को इंसान बनाने का लेकिन वो सिर्फ तभी संभव हैं जब त्यौहारों के मर्म को समझा जाए और नवरात्रि का मर्म समझने के लिए ये दुर्गासप्तशती ग्रन्थ बहुत उपयोगी हैं जिससे जीवन को बेहतर करने में भी मदद मिलेग...

🔥🔥🔥जीवन संघर्ष तो है ही यहां लड़े बिना बात बनेगी नहीं। 🔥बाहरी लड़ाई प्रतीक मात्र है भीतर लड़ाई का की भीतर तो सतत् एक संग्राम चलना ही है। 🔥🔥 💪💪💪 जब शिव ही सगुण हो जाते हैं तो शक्ति कहलाते हैं। 🪔🪔🪔कथा इसलिए है कि तुम सिद्धांत तक पहुंचो सिद्धांत इसलिए है कि तुम सत्य तक पहुचो तुमने अगर उलटी गंगा बहा दी और कथा को ही सत्य मान लिय तो फँस जाओगे।🪔🪔 ☘️☘️☘️☘️प्रकृति के पार जाने का अर...

प्रकृति को समझना अहम को समझना एक ही बात है। प्रकृति की व्यापकता हमको व्यापकता प्रदान करता है। हमारी व्यापक समझ प्रकृति को व्यापकता प्रदान करती है। हमारी छुद्रता ही प्रक्षेपित होकर प्रकृति के प्रति छुद्र बनती है। वास्तव में प्रकृति हमें सारे चुनाव का अधिकार देती है जिससे हम निर्मित होते हैं। शुद्धता का विकल्प हमें परस्पर उचित संबंध प्रदान कर मुक्ति प्रदान करती है जबकि विरोधी संबंध बंधन और विनाश की ...

दुर्गासप्तशती में देवी प्रकृति का स्वरूप है और जो प्रकृति को भोगना चाहते है वो सभी राक्षस ही है । राक्षस कोई अलग से पैदा होने वाला प्राणी नहीं वो मनुष्य ही है जो प्रकृति को मां नहीं भोगने की वस्तु मानते है । प्रकृति मां है ,पत्नी नहीं । जो उन्हें भोगने को आतुर हो वही राक्षस है। पृथ्वी को जो लगातार अपने भोग के लिए इस्तेमाल कर रहे है वहीं है शुंभ निशुंभ । प्रकृति के बालकों अर्थात जानवरों को खा रहे ह...

एक अनूठा ग्रंथ जो देवी के तीन विभिन्न रूपों पर , देवताओं और दानवों पर केंद्रित है। राजा और व्यापारी के सवालों का उत्तर ऋषि ने तीन चरित्रों में वर्णित कहानियों के माध्यम से दिया किंतु पढ़ने में किसी भी पाठक को ये कहानियां बाहरी और कोई दूसरी दुनिया की प्रतीत हो सकती हैं लेकिन आचार्य जी ने सरल भाषा में इन कहानियों का अर्थ वो भी वेदांत की दृष्टि में दिया है। जो कहानियां बाहरी दिखती हैं लेकिन हैं भीतर...

● Book made me realise about how the cycles of sorrow and happiness goes on due to the absence of self-knowledge or the submission towards the ultimate/nature. ● I used to believe that Devi is some sort of God that society has created to worship, just like other gods but after reading this my misconceptions got cleared that I had about Indian as well as cultures abroad. ● Not only the stories abo...

मनुष्य ने अपने स्वार्थ, कामनाओं को पूरा करने के लिए प्रकृति का विनाश कर रखा है । क्लाइमेट चेंज इसका एक उदाहरण है । राक्षस तो आज भी जो माँसाहार के लिए जानवरों की हत्या करना है। अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के प्रति उपभोग का संबंध रखना । वो कहानियां आज की स्थिति ही है

इस पुस्तक को पढ़कर इतना तो समझ आया कि महिषासुर कहीं बाहर नहीं है वह हमारे अंदर ही है। इस पुस्तक में आचार्य जी धार्मिक प्रतीकों ,देवी के रूपों और असुरों के साथ युद्ध को केवल पौराणिक कहानियों की तरह नहीं बल्कि हमारे मन के भीतर चल रहे संघर्षों को भी बताया है। महिषासुर, शुंभ-निशुंभ जैसे राक्षस हमारे भीतर के अहंकार, वासना, लोभ, मोह आदि का प्रतिनिधित्व करता है। हम हर चीज को बाहर ढूंढते हैं। मां दुर्गा द...

प्रकृति से हमारा संबंध कैसा होना चाहिए, इस पुस्तक के माध्यम से इस पर स्पष्टता प्राप्त हुई। जब तक इंसान प्रकृति को भोग की वस्तु समझता रहेगा, वह स्वयं का ही नुकसान करता रहेगा। यह मानो स्वयं को ही भोगने और स्वयं को ही हानि पहुँचाने जैसा है, क्योंकि हम भी प्रकृति ही हैं। देवी माँ को प्रकृति की पालनकर्ता क्यों कहा जाता है, सिंह और अन्य पशु किसके प्रतीक हैं—इस पर भी स्पष्टता मिली। बहुत कुछ समझ में आया।...

I never thought even in my dreams that these mythological stories had some real meaning in them. Aacharya ji helped me understand that all the Devi's are the different forms of Nature(prakriti= mya= mata) and the mommy is not for consumption but for real love, care and respect. In the end of every adhyay, saptshati says "and then with the end of asuras, airs were stabilized, rivers went back to th...

दुर्गा सप्तशती आचार्य जी द्वारा लिखित वो उच्चतम ग्रन्थ है जिसमे आचार्य जी ने इस बात को एकदम तथ्यगत और तर्कपूर्ण तरीके से रखा है कि अगर प्रकृति को बचाओगे तभी तुम भी बच सकते हो वरना प्रकृति का तुम इसी तरह भोग,मांसाहार,अंधाधुंध कार्बन एमिशन करते रहे तो वो सिर्फ प्रकृति का सर्वनाश नहीं,साथ ही साथ तुम्हारी पूरी प्रजाति का भी सर्वनाश होगा।इस पुस्तक को गहराई से पढ़िए और आज के समय का जो कुरुक्षेत्र है उसम...

इस पुस्तक के लिए आचार्य जी का जितना धन्यवाद करूं उतना कम है। इस पुस्तक की सहायता से ही देवी मां के वास्तविक रुप से परिचित हो पाई। नवदुर्गा का त्यौहार क्या है, हम इसे क्यों मनाते है; ये जान पाई। गरबा,पांडाल,व्रत और बाजार से ऊपर उठ कर त्यौहार के महत्व को जान पाई। एक-एक प्रतीक किस प्रकार वर्तमान परिदृश्य में उपयोगी है इस बात को गहराई से समझने मिला। ~धन्यवाद आचार्य जी❤️🙏 🙏🙏स्वयं को जानने का ही अर...

दुर्गा सप्तशती ने मुझे प्रकृति को समझने में मदद की है कि केवल हमारे बाहर जो है केवल वही प्रकृति नहीं है बल्कि हमारे भीतर जो.कुछ भी विचार भाव है वे सब प्रकृति ही है अगर आप उन्हें समझते हो तो आप प्रकृति की आराधना कर रहे हो दुःखों से मुक्ति की और यदि आप अंधा भोग में लगे हो तो माँ आपका नाश कर देंगी।