![दुर्गासप्तशती | Durga Saptashati [National Bestseller]](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-f3e8ff5c-1f41-4cca-b30a-9d54c811eebb/30/image.jpg)
सम्पूर्ण पाठ
दुर्गासप्तशती ✨ हमारे शरीर में ही असुर बैठे हुए हैं, जो हमारे दुःख का कारण हैं। और वे हमारी बुद्धि को भ्रमित करते हैं। हम जब तक जानेंगे नहीं, तब तक हम दुःख से मुक्त नहीं हो पाएँगे। ✨ आत्मज्ञान ही माँ का दर्शन है। ✨ अहंकार प्रकृति ही है। जब मुनि पक्षियों को ज्ञान दे रहे हैं, इसका मतलब अहंकार प्रकृति का ही उत्पाद है। ऋषि पक्षियों को ज्ञान दे रहे हैं, इससे आशय यह है कि वह अहंकार, जो अभी शरीर के तल...

आचार्य जी की दुर्गा सप्तशती आध्यात्मिक साहित्य की एक उत्कृष्ट कृति है, जो देवी-उपासना को आत्मजागरण और आंतरिक परिवर्तन के मार्ग के रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक श्रद्धा और विवेक का सुंदर संगम है तथा हर गंभीर साधक और जिज्ञासु पाठक के लिए अवश्य पढ़ने योग्य है।

मैं सोचता था महिषासुर और अन्य राक्षस को महामाया मारती हैं , पर अब समझ मैं आ रहा है कि महिषासुर बाहर नहीं मेरे अंदर है , जो मेरे कामना के माध्यम से प्रकट होता है हम हमेशा किसी को उसके कर्म के अनुसार देखते हैं कि वह अच्छा है या बुरा। हमारे पास अच्छाई का और बुराई का एक लिस्ट दिमाग मैं होता है। और उसी से हम तय करते है कि कोई अच्छा है या बुरा। पर दुर्गासप्तशती हमें सिखाती है कर्म नहीं करता को देखो। कर्...