
आचार्य जी की दुर्गा सप्तशती आध्यात्मिक साहित्य की एक उत्कृष्ट कृति है, जो देवी-उपासना को आत्मजागरण और आंतरिक परिवर्तन के मार्ग के रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक श्रद्धा और विवेक का सुंदर संगम है तथा हर गंभीर साधक और जिज्ञासु पाठक के लिए अवश्य पढ़ने योग्य है।