
इस पुस्तक के लिए आचार्य जी का जितना धन्यवाद करूं उतना कम है। इस पुस्तक की सहायता से ही देवी मां के वास्तविक रुप से परिचित हो पाई। नवदुर्गा का त्यौहार क्या है, हम इसे क्यों मनाते है; ये जान पाई। गरबा,पांडाल,व्रत और बाजार से ऊपर उठ कर त्यौहार के महत्व को जान पाई। एक-एक प्रतीक किस प्रकार वर्तमान परिदृश्य में उपयोगी है इस बात को गहराई से समझने मिला। ~धन्यवाद आचार्य जी❤️🙏 🙏🙏स्वयं को जानने का ही अर...