ब्रह्म के सगुण हो जाने को देवीत्व कहते हैं। शिव से अनन्य हैं शिवानी; महादेव से अभिन्न हैं भवानी।
यह पुस्तक देवी के वास्तविक स्वरूप को दर्शाती है। बहुत सुंदर, सटीक, सार्थक व्याख्या। देवी के मर्म को समझने में उपयोगी है यह पुस्तक। जितनी बार पढ़ें कम ही लगता है।