प्रकृति को भोगों नहीं, उसका उपयोग करो मुक्ति के लिए। हमारे अंदर ही असुर और देव है, अपनी शक्ति ऊंचे काम में लगा दो, यही से देवी का प्राकट्य होता है भीतर। पशु का शोषण, प्रकृति का शोषण और स्त्री का शोषण एक साथ चलते है।