प्रकृति,देवी,राक्षस,संहार,मूलअहमवृत्ति,व्यक्तिगत अहंकार अगर आपको यह सब जानना हैं,तो आपको ये दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को पढ़ना ही चाहिए।बहुत ही स्पष्टता से इस ग्रंथ में आचार्यजी ने हमें समझाया हैं।