
✍🏻 पोस्ट 20 | 25 अक्टूबर ’26 💭 विषय — फ़िल्में/गीत/पुस्तकें/कला ──────────── 🕊️ जुनून - इज़्ज़तदार या दग़ाबाज़? 🎬 श्याम बेनेगल की फ़िल्म जुनून (1978) रस्किन बॉन्ड की कहानी A Flight of Pigeons पर आधारित है। 1857 के विद्रोह के दौरान शाहजहाँपुर में एक ब्रिटिश परिवार पर हमला होता है। रूथ और उसकी माँ मिरियम को पहले लाला रामजीमल शरण देते हैं। बाद में पठान ज़मींदार जावेद ख़ान उन्हें ज़बरदस्ती अपने घर ले जाता है। जावेद रूथ के प्रति आकर्षित हो जाता है, लेकिन उसका आकर्षण धीरे-धीरे अधिकार और जुनून में बदल जाता है। बाहर अंग्रेज़ों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी रहता है। ⚔️ फ़िल्म का एक दृश्य बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक तरफ़ लोग अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ़ जावेद ख़ान अपनी प्रेमिका और कबूतरों के साथ अपने निजी संसार में सिमटा हुआ है। वहीं एक सिपाही लड़कर घायल लौटता है और कहता है, “हम दिल्ली की लड़ाई हार गए!” यहाँ बात फ़िल्म से जीवन में लौटती है! 🕊️ जैसे कबूतर अपने छोटे-छोटे पिंजरों के भीतर गुरगुराते रहते हैं, तो जब तक वे पिंजरे में बंद हैं, वे बाहर निकलकर चीलों का सामना कैसे करेंगे? इसी तरह हम भी अपने छोटे-छोटे पिंजरे बना लेते हैं। किसी का पिंजरा उसका परिवार है, किसी का निजी सुख, किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा और किसी की अपनी सुविधा। वह पिंजरे के भीतर बैठकर ख़ुद को सुरक्षित और इज़्ज़तदार समझता है, जबकि बाहर कोई अपनी जान दाँव पर लगा रहा होता है। 👉 फिर फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह द्वारा निभाया गया सरफ़राज़ ख़ान का किरदार अंग्रेज़ों के हाथों बेरहमी से मारा जाता है। संख्या में कम, हथियारों में कमज़ोर। दिल्ली की हार की ख़बर लेकर लौटने वाला यही सरफ़राज़ ख़ान है। 🔍 दगा केवल सामने से वार करना नहीं है। दगा यह भी है कि जब कोई संघर्ष कर रहा हो, तब आप अपनी सुरक्षा के लिए उसे अकेला छोड़ दें। 🪞 ज़रा अपने जीवन में देखिए। जहाँ किसी को आपके साथ की ज़रूरत थी, वहाँ क्या आपने सुविधा चुनी? जहाँ किसी के लिए खड़ा होना जोखिम भरा था, वहाँ क्या आपने चुप रहना बेहतर समझा? और फिर अपनी चुप्पी को समझदारी, अपने डर को विवेक और अपने स्वार्थ को शांति का नाम दे दिया? ❓ आप बताइए, आपने किसको दगा दिया है? किसे अपनी सुविधा, सुरक्षा या व्यक्तिगत शांति के लिए अकेला छोड़ दिया? अपने भीतर झाँकिए और कमेंट में लिखिए। 📚 स्रोत लिंक 1. British Film Institute — Junoon (1978) https://www.bfi.org.uk/film/3e7d90e0-be14-54fe-9c3a-ec918cbd8679/junoon 2. Directorate of Film Festivals — Indian Panorama Catalogue 1978–79 https://dff.nic.in/images/Documents/143_IPCatalogue1978-79.pdf















































