
Jyoti
मेरा भी पिंजरा है जहाँ मैं खुद को कैद कर लेती हूं सीमा में बांध लेती हूं,मन से भाव आता है कि सुरक्षित हूं कोई तो है जिसके सहारे जीवन जी सकते हैं यही सब पिंजरे में रखता है। जैसे कोई रिश्ता,संबंध ये सब होता जो मन में छा सा जाता है फिर बाहर के संघर्ष से भी बच जाते हैं और भले उसका झूठ पता हो लेकिन अहम अकेला तो रहता नहीं है वरना शून्य ही हो जाए। कई बार बाहर के संघर्ष और भीतर के संघर्ष से बचने का उपाय खोज लेते हैं हम अपने ही निजी रिश्तों में।


















