
Sayali
सबसे ज्यादा तो मैं खुद के साथ ही दगा करती हूँ। छोटी से छोटी बात के लिए यहां तक कि सुबह उठना रहता हैं। उसमें भी दगा करती हूं। लाइव सेशन तो अभी अटेंड करने लगी हूँ। पर तुरंत अवलोकन लिखने के लिए ऐसा होता है एक बार रिकॉर्डिंग देख लूं । जिससे सत्र को और अच्छे से समझ पाऊंगी फिर अवलोकन लिखती हूं। लेकिन फिर उसकी रिकॉर्डिंग हीं नहीं सुनती हूं। फोन हाथ में रहेगा सब कर लूंगी पर ap AAP नहीं ओपन करती हूं। और ये भी पता रहता है। जैसे ही AAP ओपन होगा। तुरंत किसी न किसी मान्यता पर चोट पड़ेगी। मैं जीवन को कैसे जी रही हूं। वो साफ साफ दिख जाएगा। ये जो मजबूरी का रोना है। झूठ साबित हो जाएगा। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻


















