नेहा जी बताती हैं कि वर्षों तक वे एक विषाक्त रिश्ते में केवल बदनामी के डर से फँसी रहीं। समाज की धारणाएँ उनके निर्णयों पर हावी थीं। 🔹 आचार्य जी को सुनना शुरू करने के बाद उन्होंने धर्म और सामाजिक मान्यताओं को समझ की कसौटी पर परखना सीखा। इसी स्पष्टता ने उन्हें उस रिश्ते से बाहर निकलने का साहस दिया। 🔹 आज वे आत्मविश्वास के साथ अकेले यात्रा करती हैं, विभिन्न राज्यों और विदेश में काम कर चुकी हैं, तथा पशुओं के प्रति संवेदनशीलता को समझते हुए वीगन जीवनशै… Read more











































