असत्य कुछ नहीं, सब आंशिक सत्य है || आचार्य प्रशांत (2013)
आचार्य प्रशांत
मुसीबतों को रोते हो और मदद को क्यों ठुकराते हो? || आचार्य प्रशांत (2013)
शरीर की नहीं, मन की मृत्यु से डरते हो तुम || आचार्य प्रशांत (2013)
कल्पना है शहद की धार,असली प्रेम खड्ग का वार || आचार्य प्रशांत (2013)
बँधा मन बँधा जीवन, बँधा व्यवहार बँधे रिश्ते और संसार || आचार्य प्रशांत (2013)
गुरु तुम्हें वो याद दिलाता है जो तुम जानते ही हो || आचार्य प्रशांत (2013)
संसार श्रम, सत्य विश्राम || आचार्य प्रशांत (2013)
धर्म को नशा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत (2015)
ताकत मत माँगो, देखो कि क्या तुम कमज़ोर हो || आचार्य प्रशांत (2016)
मैं दुविधा में क्यों रहती हूँ? || आचार्य प्रशांत (2013)
हारोगे तुम बार-बार, बस कोई हार आखिरी न हो || आचार्य प्रशांत (2014)
जिस दवा से मर्ज़ दूर हो रहा हो, उसे नमन करो और लेते रहो || आचार्य प्रशांत (2014)
अपने सपनों का अर्थ जानो || आचार्य प्रशांत (2016)
सत्य में डूबते हैं, अंजाम का अनुमान नहीं लगाते || आचार्य प्रशांत (2016)
न बंधन है,न मुक्ति चाहिए || आचार्य प्रशांत, उपनिषद पर (2014)
शास्त्रों के स्रोत का अनुमान नहीं लगाना चाहिए || आचार्य प्रशांत (2014)
शास्त्र सहारा देते हैं, असली गुरु जीवन है || आचार्य प्रशांत (2014)
न हुआ न हो रहा न होने के आसार,पर होता खूब प्रतीत होता ये संसार || आचार्य प्रशांत (2014)
सत्य अकस्मात उतरता है || आचार्य प्रशांत (2014)
बदले स्थिति न बदले तुम्हारा स्थान, राजा वो जो आसन पर विराजमान || आचार्य प्रशांत (2014)
संवेदनशीलता ही वास्तविक सभ्यता है || आचार्य प्रशांत (2014)
आत्म-जिज्ञासा क्या है? || आचार्य प्रशांत (2014)
मन तुम्हारा पूरा भय से युक्त,कभी मत कहना तुम भय से मुक्त || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
अर्थ द्वारा समझे तो अच्छा, बिना अर्थ समझे तो और अच्छा || आचार्य प्रशांत (2014)
हृदय भर कब पाया लेने से, पाया कितना यह साबित होता देने से? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
अपने अंधकार से दूसरों को कैसे रौशन कर पाओगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
न बंधन से मोह न मुक्ति से अनुरक्ति, मोक्ष है बंधन और मोक्ष दोनों से मुक्ति || आचार्य प्रशांत (2014)
सारे सूखेपन को बहा ले जाता है प्रेम || आचार्य प्रशांत, कबीर पर (2014)
बँटा मन तो बँटा जीवन || आचार्य प्रशांत (2014)
उसके बिना तड़पते ही रहोगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)