
मैं भी पहले सोचता था की, जिन लोगों ने इतिहास में कुछ अच्छा किया है या हो अभी कर रहें है, उनके पास कुछ अलग होता होगा, लेकिन इस किताब से मुझे पटक चला की, कोई अलौकिक नहीं होता, सब इसी ज़मीन से, इसी मिट्टी से पैदा होते हैं, एक मानव के गर्भ से पैदा होते हैं। हमारे आपके चुनाव की बात होती है कि ज़िंदगी कैसी जाएगी, कितनी ऊँची जाएगी। कुछ लोग सही चुनाव करते हैं और कुछ डर के मारे नहीं करते हैं, इतना ही अंतर ...

ज्वाला” पढ़ते समय सबसे पहले जो बात समझ में आई, वह यह थी कि जिन महापुरुषों को हम आज आदर्श मानते हैं, उनका जीवन भी आसान नहीं था। उनके जीवन में भी उतनी ही कठिनाइयाँ, भ्रम और संघर्ष थे जितने आम इंसान के जीवन में होते हैं। इस किताब ने मुझे यह समझने में मदद की कि महान बनने का मतलब कोई खास जन्म लेना नहीं है, बल्कि सही दिशा में लगातार संघर्ष करना है। स्वामी विवेकानंद, गुरु गोविंद सिंह जैसे उदाहरणों के माध...

कानपुर वाले फूफा 🧔, पुश्तैनी एक्टर ठिकाना कपूर 🎬 और सट्टा प्रचारक-cum-क्रिकेटर छोटू मोहली 🧢 को आदर्श बनाने के कारण मेरा जीवन तो बर्बादी की ओर ही जा रहा था 💀। फिर आए आचार्य जी 🪔, और अपने साथ लाए असली महानायकों की गाथाएँ 📜, जो वास्तव में आदर्श कहलाने योग्य थीं 🌟। समाज ने एक आम युवा के सामने घटिया लोगों की छवि को इतना रोचक 😅 और हमारे युगपुरुषों की छवि को इतना उबाऊ बना दिया 😐 कि सही लोगों को ...

*ज्वाला — युग पुरुषों का अमर संघर्ष* आचार्य जी की पुस्तक ज्वाला में युग पुरुषों का अमर संघर्ष है। उन्होंने इसमें अनेक युग पुरुषों — स्वामी विवेकानंद, गुरु गोविंद सिंह, महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह — के संघर्षों से हमें अवगत कराया है। इनमें से बहुतों को मैं इस किताब को पढ़कर ही जानी — जैसे धूमिल, संत रैदास, राम प्रसाद बिस्मिल। इनको तो मैं जानती तक न थी। सो...

इस बुक के माध्यम से हमें हमारे महापुरुषों के संघर्ष के बारे में जानने को मिला। और यह जानने को मिला की अगर वास्तव में इंसान सही संघर्ष में जूझ जाए। संघर्ष को अपना जीवन बना ले तो वह स्वयं तो प्रकाशित होगा ही, पूरे विश्व को अपने प्रकाश से प्रकाशित करेगा।

ऊंची क्रांति का आधार बोध है। सभी महापुरुषों के वास्तविक संघर्ष के तथ्यों को सामने लाती है ये पुस्तक। हमारी खुद की कमजोरियों पर प्रश्न चिन्ह लगाती है, सोचने, समझने जानने को प्रेरित करती है। एक साथ महापुरुषों का परिचय कराती है। बच्चे, परिवार, दोस्तों को हर किसी को भेंट में देने के लिए सबसे बेहतरीन उपहार है।
नमस्कार आचार्य जी ,आपने अपने ज्वाला book ke chapter no 7 आंबेडकर अगर होते आज ,में एक प्रश्न का जवाब देते हुए अब्राहमिक religion ke बारे में कटाक्ष किया जिससे मैं थोड़ा कम इत्तेफाक रखता हूं ,अपनी चीजों का प्रसार करना ठीक है फॉर एग्जांपल जैसे आप अपने धर्म की अच्छी चीजों का प्रचार हर माध्यम (सकारात्मक तरीके) से कर रहे हैं और करना भी चाहिए इसे अंदर ही अंदर सभी कुबूल भी कर रहे हैं अन्य धर्मों के जागरू...

हमारे देश के वीर योद्धाओं की वो कहानियां जो समाज के सामने नहीं लाई जाती है ज्वाला बुक में उन कहानियों का वर्णन किया गया है और उन कहानियों से सिख कर हम एक सच्चे इंसान बन सकते है इस बारे में बताया गया है। ज्वाला को पढ़के मेरी जिंदगी में भी ज्वाला की ज्योति जगी।❣️

ज्वाला पुस्तक पढने के बाद ऐसा लगता है,कि इतिहास में हमसे महापुरुषों के जीवन के असली संघर्षों को बहुत कम उल्लेखित किया गया है, उनके धर्म आधारित तथ्य जैसे- वेदांत , गीता और उपनिषद से उनकी सीखों और उससे प्राप्त आत्मबल के बारे में बहुत कम ही उल्लेख किया गया है I मेरा सभी जिग्याषुओं से अनुरोध है कि , इस पुस्तक को एक बार नहीं बार - बार पढना चाहिए , ताकि महान लोगों के संघर्ष के असली सच को जान सकें और अन्...

यह बुक हम युवाओं के लिए है जो हमें बताती है कि भीड़ से अलग सोचने, अपना जीवन सच में लगाने, और निडर होकर निर्णय लेने में तुम्हें परेशानी क्या है। ज्वाला एक बुक मात्र नहीं है, यह वह आग है जो हमें सोचने पर मजबूर कर रही है, कि हम कैसा जीवन जी रहे हैं और क्या हमें सच में ऐसा जीवन ही जीते रहना है या कुछ अलग भी कर सकते है।

प्रिय बालसखाओं, बहुत बार आपकी उम्र से बड़ों की चर्चा सुनकर या आसपास के माहौल को देखकर, उसमें जो कुछ चल रहा है उसके प्रति कौतूहल और जिज्ञासा उठती होगी। बहुत बार उन चीजों को जानने परखने के लिए आप दूसरों की मदद भी लेते होंगे और इसी दौरान कुछ लोगों से प्रेरणा भी लेते होंगे। कभी-कभी आप यह भी देखते होंगे कि जैसे-जैसे कोई ख्याति प्राप्त नाम आपके सामने आ जाता है आप इसका अनुकरण करने की इच्छा रखते हो...

इन महात्मा और महापुरुषों के विद्रोह, संघर्ष आचार्य जी से ही समझा है जितना समझती जा रही हूं उतना अंदर से एक विद्रोह उठता जा रहा है क्रांति उठती जा रही है, जब भी यह बुक पढ़ने के लिए लेते हैं अंदर से एक ज्वाला एक विस्फोट एक आग का गोला बाहर निकाल कर आता है कि डर ,मजबूरियां, बंधन नहीं गुलामी नहीं सहेंगे, सच में अगर क्रांति करना है तो यह 🔥🔥ज्वाला💪🏾 पुस्तक पढ़ कर हो सकता है।

ज्वाला — इस किताब का नाम यूँ ही नहीं ज्वाला रखा गया है। पढ़ोगे तब समझ आएगा। ज़िंदा महापुरुष आग होता है।' ये किताब बहुत ही संक्षिप्त तरीके से उन महापुरुषों को ज़िंदा करती है। सच में आग है। आचार्य जी ने जिस गहराई और सूक्ष्मता से 'इतिहास के रात जो दीप हुए', उन महापुरुषों के जीवन और संघर्ष का वर्णन इस किताब में किया है, कहीं और नहीं मिलेगा। आप सभी से आग्रह है, आप खुद पढ़िए और अपने बच्चों को ज़रूर पढ...

From this book i got to know about struggles of great people like swami Vivekanand, which otherwise the textbook wouldn't have taight me of. They were people like us but with unbreakable zeal . This book helped me see the pettiness of my problems and focus on real struggles like breaking my conditioning.

जैसी संगति वैसा जीवन। ये पुस्तक उन महान व्यक्तित्वों से मिलती है, उनके संघर्ष और जज्बे, सच्चाई, प्रेम और करुणा, उनके भीतर की समझ से मिलती है। जिन्होंने अपने जीवन में सत्य, सच्चाई को प्रथम रखा, आजादी। पहले खुद की भीतरी आजादी और बाहरी आजादी दोनो की बात की है। यह पुस्तक हमे अपनी मान्यताओं, धारणाओं, मजबूरियों, कमजोरियों को बोध की ज्वाला से, भस्म करती है। हमे ताकतवर, बोधमय, समझदार, और सहज जीवन जीने...