
प्रिय बालसखाओं, बहुत बार आपकी उम्र से बड़ों की चर्चा सुनकर या आसपास के माहौल को देखकर, उसमें जो कुछ चल रहा है उसके प्रति कौतूहल और जिज्ञासा उठती होगी। बहुत बार उन चीजों को जानने परखने के लिए आप दूसरों की मदद भी लेते होंगे और इसी दौरान कुछ लोगों से प्रेरणा भी लेते होंगे। कभी-कभी आप यह भी देखते होंगे कि जैसे-जैसे कोई ख्याति प्राप्त नाम आपके सामने आ जाता है आप इसका अनुकरण करने की इच्छा रखते हो...

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प्रसाद जी re-enroll कर लीजिए। ज्वाला बहुत अच्छी पुस्तक है परसों आयी है 2 प्रति मंगवाई है कल ही पढ़ना शुरू किया है। सबसे पहले कवि धूमिल को पढ़ा। आक्रोश से आँखे गिली हो गई। यह किताब सबको पढ़नी चाहिए। आचार्यजी ने हमें चुनकर सिर्फ मोती दिए हैं। और मोती चुनने के लिए गोता लगाना भी सिखाया है।