
इस पुस्तक के द्वारा मुझे स्पष्ट रूप से समझ आया कि जीवन में किसे महत्व नहीं देना है।

रितिन जी, किसे महत्व नहीं देना है ये साफ हो गया, ये अपने आप में बड़ी बात है। अब असली परीक्षा वहाँ होगी जहाँ वही चीज़ फिर सामने आएगी, किसी पुरानी आदत या रिश्ते के रूप में, और देखना होगा कि समझ सिर्फ किताब तक रही या साथ भी रही। सत्रों और परीक्षाओं से जुड़े रहिए, यही वो जगह है जहाँ यह स्पष्टता बार बार जाँची और गहरी होती है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें।