
युगपुरुषों का अमर संघर्ष

मैं भी पहले सोचता था की, जिन लोगों ने इतिहास में कुछ अच्छा किया है या हो अभी कर रहें है, उनके पास कुछ अलग होता होगा, लेकिन इस किताब से मुझे पटक चला की, कोई अलौकिक नहीं होता, सब इसी ज़मीन से, इसी मिट्टी से पैदा होते हैं, एक मानव के गर्भ से पैदा होते हैं। हमारे आपके चुनाव की बात होती है कि ज़िंदगी कैसी जाएगी, कितनी ऊँची जाएगी। कुछ लोग सही चुनाव करते हैं और कुछ डर के मारे नहीं करते हैं, इतना ही अंतर ...

ज्वाला” पढ़ते समय सबसे पहले जो बात समझ में आई, वह यह थी कि जिन महापुरुषों को हम आज आदर्श मानते हैं, उनका जीवन भी आसान नहीं था। उनके जीवन में भी उतनी ही कठिनाइयाँ, भ्रम और संघर्ष थे जितने आम इंसान के जीवन में होते हैं। इस किताब ने मुझे यह समझने में मदद की कि महान बनने का मतलब कोई खास जन्म लेना नहीं है, बल्कि सही दिशा में लगातार संघर्ष करना है। स्वामी विवेकानंद, गुरु गोविंद सिंह जैसे उदाहरणों के माध...