
ज्वाला — इस किताब का नाम यूँ ही नहीं ज्वाला रखा गया है। पढ़ोगे तब समझ आएगा। ज़िंदा महापुरुष आग होता है।' ये किताब बहुत ही संक्षिप्त तरीके से उन महापुरुषों को ज़िंदा करती है। सच में आग है। आचार्य जी ने जिस गहराई और सूक्ष्मता से 'इतिहास के रात जो दीप हुए', उन महापुरुषों के जीवन और संघर्ष का वर्णन इस किताब में किया है, कहीं और नहीं मिलेगा। आप सभी से आग्रह है, आप खुद पढ़िए और अपने बच्चों को ज़रूर पढ...