
ज्वाला” पढ़ते समय सबसे पहले जो बात समझ में आई, वह यह थी कि जिन महापुरुषों को हम आज आदर्श मानते हैं, उनका जीवन भी आसान नहीं था। उनके जीवन में भी उतनी ही कठिनाइयाँ, भ्रम और संघर्ष थे जितने आम इंसान के जीवन में होते हैं। इस किताब ने मुझे यह समझने में मदद की कि महान बनने का मतलब कोई खास जन्म लेना नहीं है, बल्कि सही दिशा में लगातार संघर्ष करना है। स्वामी विवेकानंद, गुरु गोविंद सिंह जैसे उदाहरणों के माध...