
जब तक उनके वानर रूप का अर्थ नहीं जाना, जब तक ये नहीं जाना कि हम सब वानर हैं और वानर होते हुए भी हृदय में राम हो सकते हैं, तब तक हनुमान आपके लिए सार्थक नहीं हुए। सिर्फ़ वेदान्त के ही आधार पर किसी भी बात की, कथा की या दर्शन की व्याख्या की जा सकती है। वेदान्त कुंजी है, उसी से सारे ताले खुलेंगे। वेदान्त ये नहीं कह रहा कि बाकी दरवाज़ों पर मत जाओ, सिर्फ़ एक दरवाज़े से प्रवेश करो; वेदान्त कह रहा है सब दरवाज़ों पर जाओ लेकिन कुंजी यहाँ से मिलेगी। वो कुंजी नहीं ली तो कोई दरवाज़ा नहीं खुलेगा आपके लिए। वेदान्त अपनेआप में कुछ है नहीं, एक कुंजी भर है। आचार्य जी आपको उसी ताले की कुंजी देने आए हैं। ऐसा नहीं है कि कुंजी आपके पास है नहीं, वह है तो बस आप भी हनुमान जी की तरह भूल बैठे हैं। हम तो बस याद दिलाने आए हैं।
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